फ्रांसीसी उपनिवेश की स्थापना

फ्रांसीसी उपनिवेश की स्थापना भारत आने वाले अंतिम यूरोपीय व्यापारी फ्रांसीसी थे। फ्रांसीसी ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना 1664 ई में लुई सोलहवें के शासनकाल में भारत के साथ व्यापार करने के उद्देश्य से की गयी थी। फ्रांसीसियों ने 1668

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अराजक और रिवोल्यूशनरी अपराध अधिनियम, 1919

अराजक और रिवोल्यूशनरी अपराध अधिनियम, 1919 गवर्नर जनरल चेम्सफोर्ड ने 1917 में जस्टिस सिडनी रौलट की अध्यक्षता में एक समिति गठित की| इस समिति का गठन विद्रोह की प्रकृति को समझने और सुझाव देने के लिए किया गया था| इसे

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मुगल काल के दौरान सांस्कृतिक विकास

मुगल काल के दौरान सांस्कृतिक विकास बाबर, हुमायूँ, अकबर और जहांगीर जैसे मुगल शासक हमारे देश मे सांस्कृतिक विकास का प्रसार करने के लिए जाने जाते थे। इस क्षेत्र मे अधिक से अधिक कार्य मुगल शासन के दौरान किया गया

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राममोहन रॉय और ब्रह्म समाज

राममोहन रॉय और ब्रह्म समाज सामाजिक और धार्मिक जीवन के कुछ पहलुओं के सुधार से प्रारंभ होने वाला जागरण ने समय के साथ देश के सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और  राजनीतिक जीवन के सभी पहलुओं को प्रभावित किया|18वीं सदी के उत्तरार्ध

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पिट्स इंडिया एक्ट 1784

पिट्स इंडिया एक्ट 1784 1773 ई. के रेग्युलेटिंग एक्ट की कमियों को दूर करने और कंपनी के भारतीय क्षेत्रों के प्रशासन को अधिक सक्षम और उत्तरदायित्वपूर्ण बनाने के लिये अगले एक दशक के दौरान जाँच के कई दौर चले और

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मोंटेंग्यु-चेम्सफोर्ड सुधार अर्थात भारत सरकार अधिनियम-1919

मोंटेंग्यु-चेम्सफोर्ड सुधार अर्थात भारत सरकार अधिनियम-1919 प्रथम विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटेन और उसके सहयोगी देशों द्वारा यह प्रचार किया गया की वे अपनी राष्ट्रीय स्वतंत्रता का युद्ध लड़ रहे है |बहुत से भारतीय नेताओं ने ऐसा विश्वास किया कि

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थिओसोफिकल समाज

थिओसोफिकल समाज थिओसोफी’ सभी धर्मों में निहित आधारभूत ज्ञान है लेकिन यह प्रकट तभी होता है जब वे धर्म अपने-अपने अन्धविश्वासों से मुक्त हो| वास्तव में यह एक दर्शन है जो जीवन को बुद्धिमत्तापूर्वक प्रस्तुत करता है और हमें यह

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पश्चिमी भारत में सुधार आन्दोलन

पश्चिमी भारत में सुधार आन्दोलन सन 1867 ई. में बम्बई में प्रार्थना समाज की स्थापना की गई| महादेव गोविन्द रानाडे और रामकृष्ण भंडारकर इसके मुख्य संस्थापक थे| प्रार्थना समाज के नेता ब्रहम समाज से प्रभावित थे|उन्होंने जाति-प्रथा और छुआछुत के

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ब्रिटिश शासन में सामाजिक अधिनियम

ब्रिटिश शासन में सामाजिक अधिनियम 19वीं सदी की शुरुआत में ब्रिटिशों की नीतियों ने हालाँकि तत्कालीन सामाजिक समाज में व्याप्त बुराइयों के उन्मूलन में सहयोग दिया लेकिन धीरे-धीरे भारत की सामाजिक-धार्मिक बुनावट को कमजोर करने का कार्य भी किया क्योकि

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भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना 28 से 30 दिसंबर 1885 के मध्य बम्बई में तब हुई जब भारत की विभिन्न प्रेसीडेंसियों और प्रान्तों के 72 सदस्य बम्बई में एकत्र हुए| भारत के सेवानिवृत्त ब्रिटिश अधिकारी एलेन ओक्टोवियन

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उग्रपंथ और बंगाल विभाजन

उग्रपंथ और बंगाल विभाजन उग्रपंथियों का राजनीतिक उदय कांग्रेस के अन्दर ही बंगाल विभाजन विरोधी प्रदर्शनों से हुआ था|जब ब्रिटिश सरकार ने बंगाल के लोगों द्वारा किये जा रहे जन प्रदर्शनों के बावजूद बंगाल के विभाजन को रद्द करने से

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स्वदेशी आन्दोलन

स्वदेशी आन्दोलन स्वदेशी आन्दोलन की शुरुआत बंगाल विभाजन के विरोध में हुई थी और इस आन्दोलन की औपचारिक शुरुआत कलकत्ता के टाउन हॉल में 7 अगस्त ,1905 को एक बैठक में की गयी थी|इसका विचार सर्वप्रथम कृष्ण कुमार मित्र  के

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मुस्लिम लीग की स्थापना

मुस्लिम लीग की स्थापना बंगाल के विभाजन ने सांप्रदायिक विभाजन को भी जन्म दे दिया| 30 दिसंबर,1906 को ढाका के नवाब आगा खां और नवाब मोहसिन-उल-मुल्क  के नेतृत्व में भारतीय मुस्लिमों के अधिकारों की रक्षा के लिए मुस्लिम लीग का

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रौलट विरोधी सत्याग्रह

रौलट विरोधी सत्याग्रह महात्मा गाँधी ने रौलट एक्ट के विरुद्ध अभियान चलाया और बम्बई में 24 फ़रवरी 1919 ई. को सत्याग्रह सभा की स्थापना की| रौलट विरोधी सत्याग्रह के दौरान,महात्मा गाँधी ने कहा कि “यह मेरा दृढ़ विश्वास है कि

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होमरूल आन्दोलन

होमरूल आन्दोलन “होमरूल” शब्द आयरलैंड के एक ऐसे ही आन्दोलन से लिया गया था जिसका सर्वप्रथम प्रयोग श्या मजी कृष्ण वर्मा   ने 1905 में लन्दन में किया था|लेकिन इसका सार्थक प्रयोग करने का श्रेय बाल गंगाधर तिलक और एनी बेसेंट

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जलियाँवाला बाग

जलियाँवाला बाग जलियांवाला बाग हत्याकांड ने ब्रिटिशों के अमानवीय चेहरे को सामने ला दिया |ब्रिटिश सैनिकों ने एक लगभग बंद मैदान में हो रही जनसभा में एकत्रित निहत्थी भीड़ पर, बगैर किसी चेतावनी के, जनरल डायर के आदेश पर गोली

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खिलापत और असहयोग आन्दोलन

खिलापत और असहयोग आन्दोलन ब्रिटिश शासन के प्रति बढ़ते क्रोध ने खिलाफत आन्दोलन और असहयोग आन्दोलन को जन्म दिया| तुर्की ने प्रथम विश्व युद्ध में ब्रिटेन के विरुद्ध भाग लिया था| तुर्की,जोकि पराजित देशों में से एक था,के साथ ब्रिटेन

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बटलर समिति (1927 ई.)

बटलर समिति (1927 ई.) भारतीय राज्य समिति ने सर हार्टकोर्ट बटलर की अध्यक्षता में 1927 में एक समिति गठित की, जिसे बटलर समिति भी कहा जाता है| इस समिति का गठन परमसत्ता और देशी राजाओं के बीच के संबंधों की

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