घाघरा की लड़ाई

खानवा की लड़ाई ने यद्यपि दिल्ली के निर्विवाद सम्राट के रूप में बाबर की स्थापना की थी लेकिन अभी भी शेष अफगान प्रमुख सरदार बाबर की सफलता के रास्ते में एक प्रमुख बाधा के रूप में खड़े थे. इन प्रमुख

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हुमायूँ

अपने पिता बाबर की मृत्यु के बाद हुमायूं 1530 ईस्वी में सिंहासन पर बैठा. शासक बनने से पूर्व हुमायूँ बाबर की सेना में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुका था. यहाँ तक की वह बदख्शां प्रान्त का शासक भी रह चुका था.

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शेरशाह सूरी

शेरशाह सूरी का असली नाम फरीद था. वह 1486 ईस्वी में पैदा हुआ था. उसके पिता एक अफगान अमीर जमाल खान की सेवा में थे. जब वह युवावस्था में था तब वह एक अमीर बहार खान लोहानी के सेवा में

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हेमू (1501-1556)

अकबर का इतिहास पूरी तरह से अधूरा होगा यदि हेमू का जिक्र न किया जाये. हेमू अफगान शासक इब्राहीम आदिल शाह का जनरल और प्रधानमंत्री था. शेरशाह की मृत्यु के बाद अफगान सामराज्य पूरी तरह से चार भागों में बिखर

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अकबर और राजपूत

मुगल साम्राज्य के समेकित विकास और ठोस नींव प्रदान करने के सन्दर्भ में अकबर की राजपूत नीति को समझा जा सकता है. यद्यपि सभी राजपूत राजाओं ने मुगल सम्राट अकबर के समक्ष खुद को नतमस्तक कर दिया था लेकिन अभी

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अकबर: साम्राज्य निर्माता

अकबर एक महान विस्तारवादी शासक था. उसने अपने साम्राज्य का विस्तार पूर्व में बंगाल की खाड़ी से लेकर पश्चिम में कंधार तक और उत्तर में कश्मीर से लेकर दक्षिण में नर्मदा तक किया था. वास्तव में उसका साम्राज्य अलाउद्दीन खिलजी

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मुगल प्रशासन में मनसबदारी व्यवस्था

मुग़ल साम्राज्य के अंतर्गत मनसबदारी प्रणाली की औपचारिक रूप से शुरुवात मुग़ल सम्राट अकबर नें की थी. उसने इस प्रणाली को मुग़ल साम्राज्य की मजबूती का मूल आधार बनाया. मुग़ल साम्राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था के अंतर्गत मनसबदार का सीधा अर्थ

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करोड़ी व्यवस्था

इतिहासकारों द्वारा राजा टोडरमल भारत में पहले सांख्यिकीविद के रूप में चिन्हित किये जाते हैं. राजा टोडरमल मुग़ल सम्राट अकबर के दरबार में वित्त मंत्री के पद पर विराजमान थे. वह मुग़ल सम्राट अकबर के शासन प्रणाली के अन्तर्गत राजस्व

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दहसाला व्यावस्था

अकबर के वित्त मंत्री के रूप मे राजा टोडरमल ने राजस्व एकत्र करने की नयी व्यावस्था शुरू की जोकि ज़ब्ती व्यवस्था या दहसाला व्यवस्था के नाम से जानी गयी। इस व्यवस्था मे दस वर्ष मे हुई फसल की पैदावार तथा

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कनिष्क: कुषाण राजवंश (78 ईस्वी – 103 ईस्वी)

कनिष्क कुषाण साम्राज्य का सबसे शक्तिशाली शासक था। उसके साम्राज्य की राजधानी पुरूषपुर (पेशावर) थी। उसके शासन के दौरान, कुषाण साम्राज्य उज्बेकिस्तान, ताजिकिस्तान से लेकर मथुरा और कश्मीर तक फैल गया था। रबातक शिलालेख से प्राप्त जानकारी के अनुसार कनिष्क

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अबुल फजल: अकबरनामा के लेखक

अबुल फजल अपने छोटे भाई फैजी की तरह सम्राट अकबर के दरबार में नवरत्नों की सूची में से एक था. अबुल फजल की प्रमुख साहित्यिक कृतियां निम्नलिखित हैं: 1) अकबरनामा: यह तीन खंडों में लिखा गया अकबर के समय का

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अकबर के अन्य प्रशासनिक सुधार

वास्तव मे अकबर पूरे मुगल प्रशासन का सर्वे-सर्वा था। सारे कार्यकारी ,विधायी और न्यायिक फैसले उसके नाम से ही लिये जाते थे। उसके पास असीमित शक्ति थी. अकबर के मुंह से निकला हुआ शब्द राज्य का कानून होता था. उसका

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अकबर की मृत्यु

अकबर मुगल वंश का सबसे महान शासक था. उसकी मृत्यु  29 अक्टूबर 1605 ईस्वी को हुई थी. उसके निधन के बाद उसका पुत्र नुरुद्दीन सलीम जहाँगीर मुग़ल साम्राज्य का नया शासक बना. अकबर ने दक्षिण भारत में दक्कन के भाग

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जहांगीर के खिलाफ खुसरो का विद्रोह

खुसरो मिर्ज़ा, जहांगीर का ज्येष्ठ पुत्र था. उसने अपने पिता और वर्तमान शासक जहाँगीर के खिलाफ 1606 ईस्वी में विद्रोह कर दिया था. उसने अपने दादा जी अकबर को श्रद्धांजलि देने के बहाने आगरा से सिकंदरा  बाद 350 घुड़सवारो को

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इंडिया दिस वीक: 31 अगस्त-6 सितंबर 2015

31 अगस्त-6 सितम्बर 2015 के मध्य भारत के अन्दर विभिन्न क्षेत्रों में घटी महत्त्वपूर्ण घटनाओं का तिथिवार वर्णन किया गया है. 31 अगस्त 2015 • सुनील अरोड़ा ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सचिव का कार्यभार संभाला • आर.पी वटल

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