फारसी तवारिखे : राजस्थान इतिहास में योगदान

राजस्थान के इतिहास को जानने, राजस्थान के शिलालेखों, ऐतिहासिक काव्य ग्रंथों, कथा साहित्य आदि के ऐतिहासिक विवरणों के क्रम बद्ध करने सत्यापित करने अथवा तथ्यों को लिखने के लिए ऐतिहासिक साहित्य के रुप में फारसी तवारिखें एक महत्वपूर्ण और विश्वसनीय

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राजस्थान में धार्मिक आन्दोलन के कारण

मध्यकालीन भारत की सर्वाधिक महत्वपूर्ण घटना भक्ति आन्दोलन का प्रबल होना था। कुछ विद्वानों का मानना है कि भक्ति आन्दोलन इस्लाम की देन था, किन्तु दकिंक्षण भारत में यह आन्दोलन छठी शताब्दी से नवीं शताब्दी के बीच प्रारम्भ हो गया

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प्रागैतिहासिक राजस्थान की विशेषताएँ

ऐतिहासिक स्रोत तथा भारतीय सभ्यता के विकास में राजस्थान का योगदान – कालीबंगा व आहड़ का सांस्कृतिक राजस्थान का योगदान – कालीबंगा वा आहड़ का सांस्कृतिक महत्व मानव सभ्यता का इतिहास वस्तुत: मानव के विकास का इतिहास है। इस दिशा

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राजस्थान में 1857 के विद्रोह की शुरूआत इस दिन और इस स्थान से हुई

03 जून, नीमच 23 अगस्त, एरिनपुरा 09 अगस्त, अजमेर ✓​ 28 मई, नसीराबाद सबसे पहले नसीराबाद में इस विद्रोह की शुरू आत हुई थी। इसके पीछे मुख्य कारण यह था कि ब्रिटिश सरकार ने अजमेर की 15वीं बंग़ाल इन्फ़ेन्ट्री को नसीराबाद

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राजस्थान की प्रमुख कला एवं सांस्कृतिक इकाइयां

राजस्थानी भाषा साहित्य एवं संस्कृत अकादमी, बीकानेर 25 जनवरी, 1983 राजस्थान ब्रजभाषा अकादमी,जयपुर, 19 जनवरी 1986 राजस्थान हिन्दी ग्रन्थ अकादमी, जयपुर, 15 जुलाई 1969 राजस्थान संस्कृत अकादमी, जयपुर, 1981 अरबी फारसी शोध संस्थान, टोंक, दिसम्बर 1978 राजस्थान सिन्धी अकादमी, जयपुर,

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राजस्थान के प्रमुख व्यक्तिव व उनके उपनाम

राजस्थान की राधा : मीराबाई मरू कोकिला : गवरी देवी भारत की मोनालिसा : बनी ठनी राजस्थान की जलपरी : रीमा दत्ता राजस्थान का कबीर : दादूदयाल राजपूताने का अबुल फजल : मुहणौत नैणसी डिंगल का हैरॉस : पृथ्वीराज राठौड़ हल्दीघाटी का शेर : महाराणा प्रताप मेवाड़ का

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राजस्थान के स्थापत्य से संबंधित महत्तवपूर्ण प्रश्नोत्तर

  प्रश्न उत्तर जयपुर को नौ वगों के सिद्धांत पर बसाने वाला महान शिल्पकार – Great architect who settled the Jaipur on the principles of nine classes – विद्याधर भट्टाचार्य Vidhyadhar / Vidyadhar Bhattacharya सवाई जयसिंह के कल्पनानुसार जयपुर शहर की नींव

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राजस्थान के इतिहास की प्रमुख घटनाएं – प्रारंभ से चौदहवीं शताब्दी तक

  वर्ष महत्तवपूर्ण घटना 5000 ई.पू. कालीबंगा सभ्यता 3500 ई.पू. आहड़ सभ्यता 1000-600 ई.पू. आर्य सभ्यता 300-600 ई.पू. जनपद युग 350-600 ई.पू. गुप्त वंश का हस्तक्षेप 551 ई. वासुदेव चौहान द्वारा सांभर (सपादलक्ष) में चौहान राज्य की स्थापना 728 ई.

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आधुनिक राजस्थान के प्रमुख साहित्यकार एवं उनकी रचनाएं

साहित्यकार रचनाएं विशेष कन्हैयालाल सेठिया मींझर, गलगचिया, कूंक, पाताल पीथल तथा रमणिये रा सोरठा  (राजस्थानी भाषा में लिखी काव्यकृतियां) – विजयदान देथा बातां री फुलवारी (लोक कथाएं) 1974 साहित्य अकादमी पुरस्कर से सम्मानित सीताराम लालस राजस्थानी शब्दकोश – कोमल कोठारी

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Rajasthan Question Series

Que 1. सितंबर 2010 में पहली महिला पुलिस बटालियन को राजस्थान के पुलिस बैंड में शामिल किया गया है, उसका नाम क्या है? Ans. हाड़ी रानी बटालियन Que 2. हाल ही में चर्चित सरिस्का बाघ अभ्यारण्य के किस स्थान पर

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राजस्थान की प्रमुख कला एवं सांस्कृतिक इकाइयां

राजस्थानी भाषा साहित्य एवं संस्कृत अकादमी, बीकानेर 25 जनवरी, 1983 राजस्थान ब्रजभाषा अकादमी,जयपुर, 19 जनवरी 1986 राजस्थान हिन्दी ग्रन्थ अकादमी, जयपुर, 15 जुलाई 1969 राजस्थान संस्कृत अकादमी, जयपुर, 1981 अरबी फारसी शोध संस्थान, टोंक, दिसम्बर 1978 राजस्थान सिन्धी अकादमी, जयपुर,

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राजस्थानी जैन साहित्य

ख्यात साहित्य की परम्परा के जैसे ही, राजस्थान के इतिहास के लिए जैन साहित्य का भी विशेष महत्व है। यह साहित्य जैन मुनियों, आचार्यों तथा श्रावकों द्वारा लिखा गया मूलत: जैन धर्म के उपदेशों की विवेचना, तीर्थंकरों की महत्ता, जैन

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राजस्थान में छुआछुत उन्मूलन हेतु किए गए प्रयत्न

राजस्थान राज्य के समाज में विभिन्न वर्गों और जातियों के लोग निवास करते थे। अन्य प्रान्ते की अपेक्षा राजस्थान में छुआछूत की प्रथा अधिक थी। राजस्थान को पूर्व में राजपूताना कहा जाता था। राजस्तान राज्यों की रियासतों के शासक निन्म

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राजस्थान में अंग्रेजी शिक्षा का विकास

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि अठाहरवीं शताब्दी तक राजस्थान में प्राचीन भारतीय शिक्षा व्यवस्था ही प्रचलित थी। राज्य की ओर से शिक्षकों को अनुदार दिया जाता था। उन्नीसवीं शताब्दी के प्रारम्भ में शिक्षा स्थान पाठशालाएँ रिपोर्टकर्ता स्रोत १ जोधपुर ९४ निक्सन जोधपुर एजेंसी

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प्रागैतिहासिक राजस्थान की विशेषताएँ

ऐतिहासिक स्रोत तथा भारतीय सभ्यता के विकास में राजस्थान का योगदान – कालीबंगा व आहड़ का सांस्कृतिक राजस्थान का योगदान – कालीबंगा वा आहड़ का सांस्कृतिक महत्व मानव सभ्यता का इतिहास वस्तुत: मानव के विकास का इतिहास है। इस दिशा

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