राजस्थान : कृषि संबंधी महत्तवपूर्ण प्रश्नोत्तर

  प्रश्न उत्तर राजस्थान के दक्षिणी भाग अर्थात् उदयपुर, डूंगरपुर व बांसवाड़ा में आदीवासी लोगों द्वारा की जाने वाली कृषि कहलाती है वालरा/बालरा जैसलमेर व बाड़मेर जिलों में वर्षा ऋतु के दौरान बड़े-बड़े गड्ढे बनाकर पानी एकत्र कर लिया जाता

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राजस्थान चर्चित स्थान

भारतीय वायुसेना अपनी स्थापना के 80 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में अब तक का सबसे बड़ा युद्धाभ्यास ‘लाइव वायर’ चलाया – जोधपुर में वायुसेना का सबसे बड़ा युद्धाभ्यास 16 मार्च से 9 अप्रेल तक चला। इसमें एयर र्फोस की

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राजस्थान – भौगोलिक और आर्थिक परिप्रेक्ष्य

राजस्थान की चोहरी इसे एक पतंगाकार आकृति प्रदान करता है।राज्य २३ ० से ३० ० अक्षांश और ६९ ० से ७८ ० देशान्तर के बीच स्थित है। इसके उत्तर में पाकिस्तान, पंजाब और हरियाणा, दक्षिण में मध्यप्रदेश और गुजरात, पूर्व

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राजस्थान में बोई जाने वाली प्रमुख फसलें तथा उनकी किस्में

फसल किस्में गेहूं सोनालिका, सोना कल्याणा, कोहीनूर व लाल बहादुर चावल माही सुगंधा व चम्बल सुगंधा बाजरा ICTP, RHB, HHB, MBH, RBC, WCC मोठ जडिया व ज्वाला मक्का माही कंचन व माही धवल सरसों वरुणा, दुर्गामणी व पूसा कल्याणी कपास

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राजस्थान की खनिज संपदा

रंग रंगीले राजस्थान की परम्पराएं जितनी समृद्ध हैं उतनी ही यहां की धरती खनिज सम्पदाओं से भरपूर है। आजादी के बाद खनिज दोहन के लिए किए गए प्रयासों का परिदृश्य अंचभित कर देता है। राजस्थान को खनिजों का अजायबघर कहें

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राजस्‍थान : अवसरों की भूमि

राजस्‍थान एक जोशीला, मोहक राज्‍य है जहां परंपरा और राजसी शान के मि‍ले‑जुले रंग‑चि‍त्र रेत और मरुभूमि‍ में बि‍खरे हुए हैं। अपने पूरे परि‍वेश में यह राज्‍य वि‍भि‍न्‍नताओं से भरा हुआ है जहां के लोगों, रि‍वाजों, संस्‍कृति‍, पोशाक, संगीत, व्‍यवहार,

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Rajasthan Tours and Holidays

Rajasthan Tours and Holidays

Rajasthan, where culture is not just a name hidden behind the pages of forgetfulness; a place where one can imagine to have glimpses of chivalry as well as meekness. It is a civilization, which has never learnt to knock at

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राजस्थान की प्रमुख कला एवं सांस्कृतिक इकाइयां

राजस्थानी भाषा साहित्य एवं संस्कृत अकादमी, बीकानेर 25 जनवरी, 1983 राजस्थान ब्रजभाषा अकादमी,जयपुर, 19 जनवरी 1986 राजस्थान हिन्दी ग्रन्थ अकादमी, जयपुर, 15 जुलाई 1969 राजस्थान संस्कृत अकादमी, जयपुर, 1981 अरबी फारसी शोध संस्थान, टोंक, दिसम्बर 1978 राजस्थान सिन्धी अकादमी, जयपुर,

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राजस्थानी जैन साहित्य

ख्यात साहित्य की परम्परा के जैसे ही, राजस्थान के इतिहास के लिए जैन साहित्य का भी विशेष महत्व है। यह साहित्य जैन मुनियों, आचार्यों तथा श्रावकों द्वारा लिखा गया मूलत: जैन धर्म के उपदेशों की विवेचना, तीर्थंकरों की महत्ता, जैन

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राजस्थान में छुआछुत उन्मूलन हेतु किए गए प्रयत्न

राजस्थान राज्य के समाज में विभिन्न वर्गों और जातियों के लोग निवास करते थे। अन्य प्रान्ते की अपेक्षा राजस्थान में छुआछूत की प्रथा अधिक थी। राजस्थान को पूर्व में राजपूताना कहा जाता था। राजस्तान राज्यों की रियासतों के शासक निन्म

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राजस्थान में अंग्रेजी शिक्षा का विकास

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि अठाहरवीं शताब्दी तक राजस्थान में प्राचीन भारतीय शिक्षा व्यवस्था ही प्रचलित थी। राज्य की ओर से शिक्षकों को अनुदार दिया जाता था। उन्नीसवीं शताब्दी के प्रारम्भ में शिक्षा स्थान पाठशालाएँ रिपोर्टकर्ता स्रोत १ जोधपुर ९४ निक्सन जोधपुर एजेंसी

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प्रागैतिहासिक राजस्थान की विशेषताएँ

ऐतिहासिक स्रोत तथा भारतीय सभ्यता के विकास में राजस्थान का योगदान – कालीबंगा व आहड़ का सांस्कृतिक राजस्थान का योगदान – कालीबंगा वा आहड़ का सांस्कृतिक महत्व मानव सभ्यता का इतिहास वस्तुत: मानव के विकास का इतिहास है। इस दिशा

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राजस्थान की जलवायु

जलवायु का समान्य अभिप्राय है – किसी क्षेत्र में मौसम की औसत दशाएँ। समान्यत: मौसम की औसत दशाओं का ज्ञान किसी क्षेत्र के तापमान, आर्दता, वर्षा, वायुदाव आदि का दीर्घकाल तक अध्ययन करने से होता है। किसी भी क्षेत्र विशेष

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राजस्थान मे प्रमुख इतिहासकार डा. गोपीनाथ शर्मा

शारीरिक पुष्टता कम थी, प्रवास का कार्य कठिन था। कोई दूसरा विकल्प न होने के कारण गोपीनाथ को यह कार्य न चाहते हुए भी करना पड़ा। निरीक्षण का क्षेत्र विस्तृत था- भीलवाड़ा, चित्तौड़ व उदयपुर। इस प्रवास में उन्हें ऐतिहासिक

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राजस्थान में धार्मिक आन्दोलन के कारण

मध्यकालीन भारत की सर्वाधिक महत्वपूर्ण घटना भक्ति आन्दोलन का प्रबल होना था। कुछ विद्वानों का मानना है कि भक्ति आन्दोलन इस्लाम की देन था, किन्तु दकिंक्षण भारत में यह आन्दोलन छठी शताब्दी से नवीं शताब्दी के बीच प्रारम्भ हो गया

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