राजस्थान के इतिहास से संबंधित तथ्य

DoThe Best
By DoThe Best November 25, 2017 16:47

राजस्थान के इतिहास से संबंधित तथ्य

राजस्थान के इतिहास से संबंधित तथ्य

चतुरसिंह➖
📯मेवाड़ के महाराणा (1879-1929)है
📯जिसने सुखेर गांव में झोपड़ी में रहकर जनोपयोगी साहित्य का सृजनकिया
📯यह संस्कृत हिंदी राजस्थानी मेवाड़ीके अच्छे ज्ञाता थे

*🎀शंख लिपि➖
📯इस में प्रयुक्त *अक्षर शंख की आकृति से मेल खाते हैं
📯अभी तक अपढय,
📯जयपुर में विराट नगर की ग्रेनाइट पहाड़ियों की कंदराओं, बीजक की पहाड़ी भीम जी की डूंगरी, गणेश डूंगरीसे इस लिपि के प्रमाण मिले हैं

*🎀धर्मत का युद्ध➖
* 📯मारवाड़ के राजा जसवंत सिंह प्रथम द्वारा उत्तराधिकारी संघर्ष में शहजादा दाराकी ओर से औरंगजेब के विरुद्धयह युद्ध लड़ा गया था
📯यह युद्ध धरमत नामक स्थान पर लड़ा गया था
📯इस युद्ध मे औरंगजेब की विजयहुई थी
📯वर्तमान में धरमत मध्य प्रदेश राज्यमें स्थित है

🎀30 वर्षीय युद्ध➖
📯मारवाड़ के राठौड़ द्वारा वीर दुर्गादास के नेतृत्व में यह युद्ध लड़ा गया था
📯अजीत सिंह को जोधपुर का शासक बनाने हेतु मुगलों के विरुद्ध यह युद्ध (लंबा संघर्ष) किया गया था

🎀जांगलन्धर बादशाह➖
📯बीकानेर का शासक (1631-69) महाराणा करण सिंहहै
📯यह औरंगजेब का विशेष कृपापात्रथा
📯इस को औरंगजेब ने ही जांगलन्धर बादशाह की उपाधि दी थी

🎀यतुन्निसा➖
📯यतुन्निसा औरंगजेब के विद्रोही शहजादे अकबर की पुत्रीथी
📯इसका लालन-पालन और कुरान की शिक्षा व्यवस्था दुर्गादास राठौर ने अपने सान्निध्य मे की थी

🎀जोधपुर लीजन➖
📯ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा 1818की संधि के बाद जोधपुर के सवारों को अकुशल बताकर जोधपुर लीजन का गठन किया गया
📯जिसका खर्चा एक लाख पंद्रह हजार रुपए था
📯जोधपुर लीजन का मुख्यालय अजमेर बड़गांव (सिरोही) एरिनपुरा (पाली) में था

🎀जाखरी सम्मेलन➖
📯डूंगरपुर के कारावाडा गांव में 1946 में सम्मेलन का आयोजन किया गया था
📯जिसमें डूंगरपुर सेवा संघ के 18 सूत्री कार्यक्रमों की जानकारी दी गई थी
📯यह सभी जानकारियां राजनीतिक सुधार से संबंधित थी

🎀अभिनव भारत➖
📯यह एक क्रांतिकारी संगठन था
📯जिसकी स्थापना राज्य के क्रांतिकारियोंद्वारा की गई थी
📯राज्य में सशस्त्र क्रांति के सूत्रदार केसरी सिंह बारहठ, राव गोपाल सिंह ,अर्जुन लाल सेठी, व दामोदर दास राठीने इस क्रांतिकारी संगठन की स्थापना की थी

🎀कूरब➖
📯शासक द्वारा सामंत को दिए जाने वाले विशेष सम्मान की एक प्रथा है
📯इस प्रथा में शासक सामंत के कंधे पर हाथ रख कर अपनी छाती तक लेजाते हैं
📯इस प्रक्रिया से यह बताते हैं कि आप का स्थान मेरे हृदयमें है

🎀बॉह पसाव➖
📯शासक द्वारा सामंत को दिए जाने वाले सम्मान की एक रस्म है
📯इस रस्म में सामंत का अभिवादन स्वीकार कर महाराणा या राजा सामंत के कंधे पर अपने हाथरखते थे

🎀तासिमों➖
📯तासिमों धौलपुर जिलेका एक गांव है
📯यहां पर अप्रैल 1947 में श्री छतरसिंह व श्री पंचमसिंह ने तिरंगे झंडेके लिए अपने प्राणों की आहुति दी थी

🎀भोमिये➖
📯राजस्थान में रियासत काल में राजपूतों की एक जातिथी
📯यह वह राजपूत हैं जो राज्य की रक्षार्थ या राजकीय सेवाके लिए अपना बलिदान करते थे वह भोमियेकहलाए.

🎀ग्रास व ग्रासिये➖
📯सैनिक सेवा के बदले शासकद्वारा दी गई भूमि ग्रासकहलाती थी
📯इस भूमि की उपज का उपयोग करने वाले सामंत जागीरदार ग्रासिये कहलाते थे

🎀अभित्र हरि➖
📯इनका जन्म कोटा में हुआ था
📯यह एक प्रसिद्ध पत्रकार और कोटा प्रजामंडल के अध्यक्षथे
📯हाडौती में स्वतंत्रता आंदोलन के जनक कहलाते हैं

🎀देश के दीवाने➖ राजस्थान सरकार द्वारा प्रकाशित एक पुस्तक है
📯जिसमें राज्य के स्वतंत्रता  सेनानियोंकी कीर्ति कथाओं का वर्णनहै
📯स्वतंत्रता  सेनानियों की कीर्ति कथाओंके लिए इस पुस्तक में 51 सेनानियों के नामों को सम्मिलित किया गया था

🎀डाण➖
📯एक राज्य से दूसरे राज्य में माल को ले जाने पर वसूली जाने वाली लाग डाण कहलाती है

 

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