राजस्थान में स्वतंत्रता संग्राम और प्रजामंडल आंदोलन

DoThe Best
By DoThe Best January 12, 2018 17:05

राजस्थान में स्वतंत्रता संग्राम और प्रजामंडल आंदोलन

राजस्थान में स्वतंत्रता संग्राम और प्रजामंडल आंदोलन

प्रजामंडल का अर्थ??     
?राजस्थान में जन जागृति पैदा कर रियासती कुशासन को समाप्त करने उस में व्याप्त बुराइयोंको दूर करने और नागरिकों को उनके मौलिक अधिकार दिलवाने की लड़ाई वाले राजस्थान संगठनों को प्रजामंडल कहा जाता है
?अखिल भारतीय देशी राज्य लोक परिषद के प्रांतीय इकाईद्वारा चलाए गए आंदोलन प्रजा मंडल/प्रजा परिषद/लोक परिषद आंदोलनों के नाम से जाने जाते हैं
?प्रजामंडल आंदोलन देसी रियासतों में देशी राजाओं के विरुद्धचलाए गए थे

??प्रजा मंडल स्थापना के उद्देश्य??  

?रियासती कुशासनउस में व्याप्त बुराइयों को समाप्त करना
?नागरिकों के मौलिक अधिकारोंकी रक्षा करना
?राजा के संरक्षण में रियासतों में उत्तरदायी शासन की स्थापना करना राजा के संरक्षण में

??राजस्थान में राष्ट्रीय चेतना और जनजागृति के विकास के विभिन्न चरण??

?राजस्थान में राष्ट्रीय चेतना और जन जागृतिका विकास ब्रिटिश आधिपत्य के बाद ही हो गया था
?लेकिन यह प्रयास सफल नहीं हो पाया था
?राजस्थान में राष्ट्रीय चेतना और जन जागृति के विकासमें राज्य कई महत्वपूर्ण परिस्थितियों ,घटनाओं, और कारणों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी

?1857के  संग्राम की पृष्ठभूमि?➖ 
☀यह सीमित जनाक्रोश का पहला विस्पोट था
☀जिसमें भावी लोक चेतना की एक ऐसी पृष्ठभूमितैयार करी थी
☀जिसने आगे चलकर राष्ट्रीय चेतना और जन जागृतिकी प्रेरणा दी

?सामाजिक एवं धार्मिक सुधारको का योगदान?➖ 
☀आर्य समाज के प्रवर्तक स्वामी दयानंद सरस्वती में राजस्थान में स्थान स्थान पर घूमकर अपने विचारोंसे स्वर्धम, स्वदेश ,स्वभाषा,स्वराजपर जोर दिया
☀जिससे सामाजिक धार्मिक सुधारों के साथ ही राष्ट्रीय नवचेतना और जन जागृति का संचार हुआ
☀इसी प्रकार स्वामी विवेकानंद,साधू निश्चलदास सन्यासी, आत्माराम ,गुरु गोविंद आदि के सतत प्रयासों से राजस्थान में राष्ट्रीय चेतनाउत्पन्न 

?पाश्चात्य शिक्षा का प्रभाव?➖ 
☀ब्रिटिश आधिपत्य के बाद राजस्थान में अंग्रेजी शिक्षा का प्रारंभ हुआ
☀इसके प्रभाव से महत्वपूर्ण राजनीतिक मामलों पर विचार-विमर्शहोने लगे
☀शासकों में पारस्परिक एकता की भावना बढी
☀ स्वतंत्रता ,समानता ,उदारता बंधुत्व, देश प्रेम आदि पाश्चात्य विचारों से जनता प्रभावित होकर अपने देश की मुक्ति और अधिकारोंके प्रति सजग होने लगी

?समाचार पत्रों और साहित्य की भूमिका?➖  
☀ब्रिटिश एवं रियासती सरकारों की दमनकारी नीति के बावजूद
☀राजस्थान केसरी,लोकवाणी, सज्जन कीर्ति सुधाकर जैसे अनेक समाचारपत्रों के माध्यम से जन जाग्रति पैदा की गयी
☀सूर्यमल मिश्रण से लेकर केसरिया बारहठऔर आगे के अनेक कवियों का जनजागृति में महत्वपूर्ण योगदान रहा
☀इन्होने अपने लेखों के माध्यम से निरंकुश शासन के दोष देशप्रेम और उसकी मुक्तिके प्रयास किए गए
☀जनकल्याण एक प्रजातांत्रिक संस्थाओंके निर्माण की आवश्यकता का प्रचार-प्रसार कर राष्ट्रीय विचारधाराएव जन जागृति उत्पन्न की गई 



?यातायात संचार के साधनों की भूमिका?➖ 

☀अंग्रेजों ने रेल-सड़क डाक आदि का विकास साम्राज्यवादी हितोंके लिए किया था
☀लेकिन इसके माध्यम से सभी व्यक्ति और राज्यों का संबंधआपस में बढ़ा
☀भारत के विभिन्न क्षेत्रों से संपर्क और एकता स्थापितहोने लगी
☀इससे जनसामान्य के विचारोंका आदान प्रदान हुआ
☀जिस कारण लोगों में राष्ट्रीय चेतनाका विकास हुआ

?जनता की शोचनीय आर्थिक दशा?➖ 
☀जनता अपनी दुर्बल आर्थिक दशा का कारण निरंकुश एवं अत्याचारी राजशाही एव उसकी भोगविलास की प्रवृत्ति और अंग्रेजी शासनको मानने लगी
☀इसका उनमूलन सामूहिक रुप से ही हो सकता है ऐसे विचारलोगों में पनपने लगे

?प्रथम विश्व युद्ध का प्रभाव?➖ 
☀प्रथम विश्व युद्ध में राजस्थान के सैनिक विदेशोंमें भेजे गए थे
☀वहां से वे स्वतंत्रता, समानता ,प्रजातंत्,र देश प्रेमआदि विचार अपने साथ लेकर आए
☀जिससे यहां की जनता को अवगत कराया और उनमें राजनीतिक जागृति उत्पन्नकी गई
☀अनेक अवसरों पर सैनिकों ने राजशाही के आदेशों की अवहेलना कर जनता पर गोली नहींचलाई
☀यह परिवर्तन-घटनाएक नए युग की सूचक थी

?शासकों में अंग्रेज विरोधी भावना का पनपना?➖ 
☀मेवाड़ अलवर भरतपुर आदि के ब्रिटिश विरोधी शासकों को जब ब्रिटिश सरकार ने हटाकर उनके पुत्रों को शासक बनाया
☀इन घटनाओं ने जनता को उद्वेलित कर दिया
☀इस घटना ने लोगों को अंग्रेज विरोधी बना दिया
☀जिससे राजनीतिक चेतनाको बढ़ावा दिया गया

?क्रांतिकारियों का योगदान?➖ 

☀बीसवीं सदी के प्रारंभ में देश में सशस्त्र क्रांतिके द्वारा अंग्रेजी राज्य के उन्मूलन की योजना बनाई गई
☀इस योजना में राजस्थान के अनेक क्रांतिकारी शहीदहुए
☀इन्होने राजस्थान के सोये हुए पौरूष को जगा कर राष्ट्रवाद की भावना की पैदा की
☀आदिवासी क्षेत्रों में किसान और जनजातीय आंदोलन में राजनीतिक चेतना जागृत करने की दिशा में असाधारण भूमिका का निर्वाह किया

?विभिन्न राजनीतिक संगठनों कानिर्माण?➖ 
☀उन्नीसवीं सदी के अंतिम दशक और बीसवी सदी के प्रथमार्द्ध में सम्य सभा (1883),सेवा समिति (1915 ),अखिल भारतीय देशी राज्य लोक परिषद (1927) आदि ने राजस्थान की जनता के विचारों को मूर्त रूप दे दिया
☀राजनीतिक चेतनाका संचार कर दिया
☀जिसकी पूर्णाहुति प्रजामंडल आंदोलन के द्वारा हुई
?यह सभी कारण ,घटनाएं प्रजामंडल आंदोलन और स्वतंत्रता संग्राम की जननीबने

??राजस्थान में स्वतंत्रता संग्राम के चरण?? 

?राजस्थान में स्वतंत्रता संग्राम 3 चरणों में विभाजित किया गया था
1⃣ पहला चरण➖ प्रारम्भ से 1927ई.के पूर्व
2⃣ दूसरा चरण➖ 1927 से 1938ई.
3⃣ तीसरा चरण 1938 से 1949 ई.

?प्रथम चरणमें प्रत्येक राज्य में यह संघर्ष अन्य राज्य की घटनाओं से प्रभावित रहकर सामाजिक अथवा मानवतावादी समस्याओंपर केंद्रित था 

  • 1920 में कांग्रेस ने प्रस्ताव पास किया था कि वह भारतीय राज्यों के मामलों में हस्तक्षेपनहीं करेगी 
  • इस कारण प्रत्येक राज्य में संघर्ष प्राय: राजनीतिक लक्ष्यसे विहीन ही रहा 


?दूसरा चरण की 1927 में ऑल इंडियन स्टेट पीपुल्स कॉन्फ्रेंस (अखिल भारतीय देशी राज्य लोक परिषद)की स्थापना से प्रारंभ हुआ

  • ?इस संस्था के स्थापित हो जाने से विभिन्न राज्यों के राजनीतिक कार्यकर्ताओं को एक ऐसा मंच मिल गया था जहां से वे अपनी बात लोगों तक पहुंचासकते थे 
  • ?1927 में देशी राज्य लोक परिषद् का प्रथम अधिवेशन हुआ था
  • ?इस अधिवेशन के बाद राजस्थान के कार्यकर्ता अत्यधिक उत्साह से वापस आए थे
  • ?यह सभी कार्यकर्ता इस संस्था की क्षेत्रीय परिषद का गठनकरना चाहते थे
  • ?जिससे राजस्थान के सभी राज्यों की गतिविधियों में समन्वय में बना रहे
  • ?1931 में राम नारायण चौधरी ने अजमेर में इस संस्था का प्रथम प्रांतीय अधिवेशन किया
  • ?जोधपुर में भी जयनारायण व्यास ने इस प्रकार का सम्मेलन करने का प्रयास किया था
  • ?लेकिन जोधपुर दरबार की दमनात्मक नीति के कारण इस सम्मेलन का आयोजन ब्यावर नगर में किया गया
  • ?इतने प्रयासों के बावजूद भी राजस्थान के राज्य की क्षेत्रीय परिषद का गठन नहीं हो पाया
  • ?इस कारण राजस्थान के विभिन्न राज्यों के नेताओ ने अपने अपने राज्यों में अपने ही साधनों से आंदोलन चलाने का निश्चयकिया
  • ?प्रजामंडल की स्थापना का आंदोलन यही से प्रारंभ हुआ

तीसरा चरण 1980 कांग्रेस के प्रस्ताव से आरंभ हुआ

  • ? इस प्रस्ताव में देशी राज्यों में स्वतंत्रता संघर्ष संबंधित राज्यों के लोगों द्वाराचलाने की बात कही ई गई थी 
  • ?तीसरे चरणसे ही प्रजामंडल की स्थापना के आंदोलन की शुरुआत हुई
  • ?1938 के बाद विभिन्न राज्यों में प्रजामंडल अथवा राज्य परिषदकी स्थापना हुई
  • ?प्रत्येक राज्य के लोगों ने राजनीतिक अधिकारों और उत्तरदायी शासन के लिए आंदोलन किए 


??राजस्थान में स्वतंत्रता संग्राम??  

  • ?राजस्थान के स्वाधीनता संघर्षके आरंभिक चरण  में किसान और जनजातियों का रियासती शासन के विरुद्ध संघर्षथा 
  • ?इस चरण में 1897 प्रारंभ होकर 1941 तक चलने वाला बिजोलिया किसान आंदोलन प्रमुखथा
  • ?यह आंदोलन स्थानीय आर्थिक धार्मिक मुद्दोंपर आधारित थे
  • ?इन आंदोलनों में राष्ट्रीयता की भावना और सामान्य जन भागीदारीका भी अभाव था
  • ?भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना 1885 में हुई थी
  • ?लेकिन रियासतोंमें लंबे समय तक कांग्रेस या उसके समानांतर संगठननहीं बन पाए थे
  • ?क्योंकि रियासतों की जनता दोहरी गुलामी का शिकार थी और जनता राष्ट्रीय धारा से अलग पड़ गई थी
  • ?कांग्रेस भी रियासतों के प्रति तटस्थथी
  • ?कांग्रेस नहीं चाहती थी कि अंग्रेजों के साथ साथ रियासती राजाओं के साथ भी संघर्ष प्रारंभ हो
  • ?महात्मा गांधी के राजनीतिक उत्थानके पश्चात ब्रिटिश आंदोलन की हवा रियासतों में भी पहुंचने लगी
  • ?स्थानीय समस्याओं को लेकर विभिन्न प्रकार के आंदोलन होने लगे और विभिन्न राजनीतिक संगठनों की स्थापना होने लगी होने लगा
DoThe Best
By DoThe Best January 12, 2018 17:05
Write a comment

No Comments

No Comments Yet!

Let me tell You a sad story ! There are no comments yet, but You can be first one to comment this article.

Write a comment
View comments

Write a comment

<

15 + 16 =