भारत का प्राचीन दर्शन-शास्त्र

DoThe Best
By DoThe Best October 3, 2015 14:29

भारत में दर्शन- शास्त्र के छः विद्यालयों का विकास ईस्वी युग के शुरुआत के साथ ही हो गया था | ये निम्न के  प्रकार थे: 1) योग, 2) न्याय, 3) मीमांसा, 4) वेदांता, 5) वैशेशिखा, 6) संख्या

संख्या

संख्या का वास्तविक मतलब गिनना है | संख्या का दर्शन शास्त्र बताता है:-

  • विश्व को प्रकृति द्वारा बनाया गया |
  • चौथी सदी A D के दौरान पुरुष को जोड़ा गया और विश्व के सृजन में प्रकृति तथा पुरुष का योगदान था |
  • संख्या विद्यालय के दर्शन शस्त्र के अनुसार, मनुष्य द्वारा वास्तविक  विद्या प्राप्त करके ही  मोक्ष  की प्राप्ति हो सकती है और उसके कष्ट समाप्त हो सकते हैं | वास्तविक विद्या अनुमान, शब्द और प्रत्यक्ष के द्वारा ही हो सकती है |

योग

योग विद्यालय के अनुसार, मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति शारीरिक आवेदन व ध्यान से हो सकती है |

  • योग  आनंद के ऊपर नियंत्रण के अभ्यास पर बल देता है | शारीरिक अंग व इंद्रियाँ इस प्रणाली का केंद्र हैं |
  • यह विद्यालय  शारीरिक कसरत के विभिन्न अवस्थाएँ जिसे आसान व श्वसन कसरत जिसे प्राणायाम कहा जाता है पर बल देता है |

न्याय

न्याय विश्लेषण का स्कूल है | यह तर्क की प्रणाली के रूप में विकसित हुआ |

  • यह विद्यालय बताता है कि मोक्ष की प्राप्ति विद्या को पाकर ही की जा सकती है |
  • इस विद्यालय ने तर्क-वितर्क व अनुमान की नींव रखी |

वैशेशिका

  • वैशेशिका विद्यालय ने द्रव्य की चर्चा पर नींव राखी | असल में, इस विद्यालय ने अणु के सिद्धांतों का प्रतिपादन किया |
  • इस सिद्धान्त के अनुसार, द्रव्य वस्तु अणु से बनीं हैं | यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि वैशेशिका ने  भारत में भौतिकी की शुरुआत की |
  • इस विद्यालय ने दोनों मोक्ष व जन्नत में पूर्ण विश्वास डाला क्यूंकि  आध्यात्मिक विश्वास और ईश्वर पर विश्वास दोनों वैज्ञानिक दृष्टिकोण में घुल गया था |

मीमांसा

  • मीमांसा का शाब्दिक अर्थ है व्याख्या व तर्क-वितर्क की कला |
  • मीमांसा के अनुसार वेदों में अनन्त सत्य को शामिल किया गया  | मीमांसा का उद्देश्य मोक्ष तथा स्वर्ग को पाना है |
  • मोक्ष को प्राप्त करने के लिए वैदिक बलिदानो के प्रदर्शन को सुझाया |
  • ब्राह्मणो ने संस्कारों के अधिकारों को बचाने की कोशिश की और मीमांसा के प्रचार के दौरान सामाजिक वर्गीकरण को बनाए रखा |

वेदांता 

वेदांता का शाब्दिक अर्थ वेद का अंत है | इस दर्शन शास्त्र का बुनियादी विषय ब्रहमसूत्र था |

  • वेदांता दर्शन शास्त्र के अनुसार, ब्रह्मा ही वास्तविकता है और बाकी सभी माया है |
  • ब्रह्मा आत्मा के जैसा है |
  • यदि कोई आत्मा के बारे में जानकारी पा ले तो वह ब्रह्मा की जानकारी पा सकता है तथा मोक्ष प्राप्त कर सकता है |
  • कर्म का सिद्धान्त वेदांता दर्शन शास्त्र से जुड़ा हुआ है |
  • वेदांता पुनर्जन्म में भी विश्वास रखता है |
  • यह संकेत करता है कि लोगों उन कर्मों के कारण कष्ट सहते हैं जिनकी उन्हें जानकारी ही नहीं होती और ना ही उन्हें रोक सकते हैं |
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By DoThe Best October 3, 2015 14:29
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