मौर्य साम्राज्य : महत्व और साहित्यिक स्रोत

DoThe Best
By DoThe Best October 5, 2015 12:38

महत्व

भारतीय इतिहास में  मौर्य साम्राज्य की स्थापना एक नये युग की शुरुआत थी| यह पूरे भारतीय इतिहास में राजनीतिक एकजुटता का प्रथम प्रयास था| इसके अलावा इतिहास लेखन और स्रोतों में सटीकता के कारण इस काल से इतिहास का लेखन आसन हो गया| साथ-साथ देशी और विदेशी साहित्यिक स्रोतों भी पर्याप्त रूप में उपलब्ध थे| इस साम्राज्य ने बड़ी मात्रा में पुरालेखीय रिकॉर्ड इस अवधि के इतिहास लिखने के लिए छोड़ दिया है|

इसके अलावा , मौर्य साम्राज्य से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण पुरातात्विक तथ्य भी जिसमे पत्थर की मूर्तियां  मौर्य कला के नायाब उदाहरण थे| कुछ विद्वानों का सुझाव है की अशोक के शिलालेख उसके शक्तिशाली और मेहनती होने का संदेश देते हैं, जो अधिकांश अन्य शासकों से पूरी तरह से अलग था| वह भव्य खिताब अपनाने वाले अन्य (बाद में) शासकों की तुलना में अधिक विनम्र था| अतः यह आश्चर्य की बात नहीं की राष्ट्र के नेताओं के द्वारा उसे एक प्रेरक व्यक्तित्व के रूप मे सम्मान दिया जाता है|

साहित्यिक स्रोत

कौटिल्य का अर्थशास्त्र : इस संस्कृत में लिखित एक किताब थी| इसका लेखक कौटिल्य था| इसे ‘ भारत का मैकियावेली ‘ कहा जाता है| सन 1904 में आर. शाम. शास्त्री ने प्रथम बार अर्थशास्त्र की पांडुलिपि की खोज की थी| यह ग्रन्थ 15 अधिकरण में विभाजित किया गया है जोकि आगे तीन भागो के अंतर्गत 180 पाठों में विभाजित किया गया है|

इसके पहले भाग में शासक और उसकी परिषद् एवं सरकार के विभिन्न विभागों की चर्चा की गयी है| इसके दुसरे भाग मेंसिविल और क्रिमिनल नियम कानूनों का वर्णन है| तीसरे भाग में युद्ध और कूटनीति का जिक्र किया गया है| यह ग्रन्थ मौर्य साम्राज्य के इतिहास के लिए सबसे महत्वपूर्ण साहित्यिक स्रोत है| इसमें ग्रन्थ में मौर्या आंतरिक प्रशासन और विदेशी सम्बन्धो आदि सभी विषयों का जिक्र किया गया है|

मेगस्थनीस की इंडिका

मौर्या साम्राज्य के बारे में जानकारी का अन्य स्रोत ग्रीक में मेगास्थनीज  द्वारा लिखित इंडिका है| मेगस्थनीस चंद्रगुप्त मौर्य का दरबारी था| वह सेल्यूकस निकेटर का यूनानी राजदूत था| इसने अपना काफी समय चन्द्रगुप्त मौर्य के दरबार में बिताया था| उसने अपना वर्णन अपनी पुस्तक इंडिका में किया था जोकि कई भागो में है फिर भी, उसकी किताब मौर्य प्रशासन के बारे में जानकारी देता है| उसने अपनी पुस्तक में पाटलिपुत्र की राजधानी और उसके प्रशासन और सैन्य संगठन के बारे में विशेष रूप से उल्लेख किया गया था| उसने समकालीन सामाजिक जीवन के बारे में उल्लेखनीय चित्रण किया है|

विसाखदत्त की मुद्रराक्षस :  यह संस्कृत में लिखित एक नाटक है| यद्यपि इसका लेखन कार्य गुप्त काल के दौरान किया गया है, लेकिन यह ग्रन्थ कौटिल्य की सहायता से नंद शासक के ऊपर चंद्रगुप्त मौर्य की विजय के बारे में वर्णन करता है| यह ग्रन्थ भी मौर्य शासकों के शासन काल में  सामाजिक-आर्थिक स्थिति के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी देता है|

अन्य साहित्य

अन्य स्रोतों के रूप में पुराणों,बौद्ध साहित्य जैसे जातक कथाओं से मौर्य साम्राज्य के बारे में जानकारी प्राप्त होती है| सिलोन के कुछ प्रमाण, दीपवंश और महावंश आदि ग्रन्थ भी श्रीलंका में बौद्ध धर्म के प्रसार में अशोक की भूमिका पर प्रकाश डालते हैं|

पुरातात्विक स्रोत

अशोक के शिलालेखों

1837 में जेम्स प्रिंसेप ने पहली बार पाली भाषा में लिखित अशोक के शिलालेखों के बारे में जानकारी दी थी| उसके कुछ अभिलेखों में प्राकृत भाषा का भी इस्तेमाल किया गया था| ब्राह्मी लिपि शिलालेखों पर लिखने के लिए इस्तेमाल की गयी थी| अशोक के इन शिलालेखों पर अशोक के धम्म के प्रचार-प्रसार के साथ-साथ उसके अधिकारियों को दिए गए निर्देशों के बारे में भी उल्लेख मिलता है| तेरहवें शिलालेख में वह कलिंग के खिलाफ लड़े गए युद्ध के बारे में जानकारी देता है|

पश्चिमोत्तर भारत में पाए गए अशोक के शिलालेख खारोष्टि लिपि में लिखे गए है| अशोक के कुल चौदह प्रमुख  शिलालेख मिले हैं I कलिंग के दो शिलालेख नव विजित रूप में प्राप्त किये गए हैं| अशोक के बहुत सारे प्रमुख स्तंभ शिलालेखों को कई महत्वपूर्ण शहरों मेंलगाया गया है| कुछ स्तंभ शिलालेख छोटे थे, जबकि कुछ शिलालेखों मामूली रॉक शिलालेखों थे| सातवा स्तंभ लेख राज्य के भीतर धम्म को बढ़ावा देने के उसके प्रयासों को वर्णित करता है| इस प्रकार अशोक के शिलालेख अशोक और मौर्य साम्राज्य के अध्ययन के लिए मूल्यवान स्रोत बने हुए हैं|

DoThe Best
By DoThe Best October 5, 2015 12:38
Write a comment

No Comments

No Comments Yet!

Let me tell You a sad story ! There are no comments yet, but You can be first one to comment this article.

Write a comment
View comments

Write a comment

Your e-mail address will not be published.
Required fields are marked*

6 − 3 =