IIT और IIM में अनिवार्य हो संस्कृत पेपर

DoThe Best
By DoThe Best September 30, 2015 12:20

IIT और IIM में अनिवार्य हो संस्कृत पेपर

प्राचीन भारत में वैज्ञानिक उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए द्वितीय संस्कृत आयोग ने भाषा के उन्नयन के लिए कई तरह की सिफारिशें की हैं। इन सिफारिशों में विशेष प्रयोगशालाएं भी स्थापित करने का सुझाव है जहां वैज्ञानिक और विद्वान साथ-साथ बैठकर प्राचीन भारत के वैदिक यज्ञों, वैदिक यज्ञ की राख के उपचारात्मक गुण, बारिश आदि विश्वासों का परीक्षण कर सकें।

पद्मभूषण सत्यव्रत शास्त्री की अगुवाई वाले 13 सदस्यीय पैनल ने स्कूली शिक्षा में चार भाषा फार्मूले को लागू करने का भी सुझाव दिया है। सुझाव यह भी है कि फार्मूले के तहत कक्षा 6 से 10 तक संस्कृत की पढ़ाई को अनिवार्य विषय बनाया जाए। इस आयोग का गठन 58 साल बाद किया गया है। इसका गठन यूपीए-2 सरकार ने लोकसभा चुनाव के कुछ पहले ही किया था। पहला संस्कृत आयोग 1956 में बना था। आयोग ने अपनी 460 पेज की अंतिम रिपोर्ट मानव संसाधन मंत्रालय को पिछले माह सौंप दी है।

सरकार इन दिनों इसकी सिफारिशों पर अध्ययन कर रही है। आयोग ने यह भी सिफारिश की है कि सभी वैज्ञानिक और प्रौद्योगिकी संस्थाओं में संस्कृत पेपर को अनिवार्य किया जाए और सभी संकायों में संस्कृत अध्यापकों की नियुक्ति की जाए। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वर्तमान में कृषि विश्वविद्यालयों, आईआईटी, आईआईएम जैसे उच्चस्तरीय संस्थानों में केवल पश्चिमी देशों के ज्ञान पर आधारित शिक्षा दी जा रही है। कभी ज्ञान में सिरमौर रहे भारत की प्राचीन उपलब्धियों का छात्रों को कोई ज्ञान नहीं है।

इस मुद्दे पर पद्मभूषण शास्त्री ने कहा कि रिपोर्ट को पहले संसद में रखा जाएगा। इसके बाद ही इसे जनता के लिए जारी किया जाएगा। मेरा इस बारे में अभी कुछ कहना उचित नहीं होगा।

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