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राष्ट्रपति चुनाव के लिहाज से एनडीए आगे, लेकिन छह पार्टियां खेल बिगाड़ भी सकती हैं

DoThe Best
By DoThe Best April 24, 2017 16:47

राष्ट्रपति चुनाव के लिहाज से एनडीए आगे, लेकिन छह पार्टियां खेल बिगाड़ भी सकती हैं

राष्ट्रपति चुनाव के लिहाज से एनडीए आगे, लेकिन छह पार्टियां खेल बिगाड़ भी सकती हैं

बंटे हुए विपक्ष की तुलना में एनडीए के पास करीब 13 फीसदी वोटों की बढ़त है और खेल बिगाड़ सकने वाली छह पार्टियों के पास भी करीब इतने ही वोट हैँ

 

राष्ट्रपति चुनाव

देश के अगले राष्ट्रपति का चुनाव नजदीक आ रहा है. जुलाई में होने वाले इस चुनाव के लिहाज से केंद्र में सत्ताधारी एनडीए (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) को यूं तो बढ़त हासिल है. हालांकि छह पार्टियां ऐसी भी हैं, जो उसका खेल बिगाड़ने की भी क्षमता रखती हैं.

द इकनॉमिक टाइम्स के मुताबिक, एनडीए (23 पार्टियों के सांसद और राज्यों की विधान सभाओं/विधान परिषदों के सदस्य मिलाकर) के पास राष्ट्रपति चुनाव से संबंधित इलेक्टोरल कॉलेज में तकरीबन 48.64 फीसदी वोट हैं. इसके विपरीत राज्य या केंद्र में राजनीतिक समीकरणों के आधार पर कांग्रेस की अगुआई वाले विपक्ष के साथ जा सकने वाली 23 पार्टियों का वोट प्रतिशत 35.47 फीसदी के लगभग. यानी अभी की स्थिति में एनडीए के पास करीब 13.17 फीसदी वोट ज्यादा हैं.

लेकिन छह पार्टियों (आम आदमी पार्टी, बीजू जनता दल, भारतीय राष्ट्रीय लोकदल, वाईएसआर कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और एआईएडीएमके) ने अब तक रुख साफ नहीं किया है. और दिलचस्प बात है कि इन छहों दलों का वोट प्रतिशत भी 13 के ही आसपास है. यानी अगर ये सभी दल एनडीए के खिलाफ चले जाएं तो उसके प्रत्याशी को चुनाव जीतने में मुश्किल हो सकती है. लेकिन कहीं इनमें से एकाध भी एनडीए के साथ आया तो उसके उम्मीदवार को जीतने से भी कोई नहीं रोक सकता.

गौरतलब है कि राष्ट्रपति चुनाव में लोकसभा और राज्यसभा के सभी सदस्यों सहित विधान सभाओं/विधान परिषदों के सदस्य भी वोट देते हैं. इनको मिलाकर राष्ट्रपति पद के चुनाव का इलेक्टोरल कॉलेज बनता है, जिसमें कुल 784 सांसद और 4,114 विधायक/विधान पार्षद हैं. इस कॉलेज में सांसदों/विधायकों- विधानपार्षदों के वोट का मूल्य नियम के अनुसार अलग-अलग होता है. हर सांसद के वोट का मूल्य 708 है.

जबकि विधायक/विधानपार्षदों के वोट का मूल्य संबंधित राज्य की विधानसभा की कुल सदस्य संख्या और वहां की आबादी के आधार पर निकाला जाता है. इस हिसाब से उत्तर प्रदेश के हर विधायक के वोट का मूल्य सबसे ज्यादा 208 है. वहीं सिक्किम के हर विधायक के वोट की मूल्य सबसे कम- सात है.

इस तरह राष्ट्रपति पद के लिए कुल वोट फिलहाल 10,98,882 हैं. इसमें चुनाव जीतने के लिए 5.49 लाख वोट चाहिए. जबकि एनडीए के पास 4.57 लाख वोट हैं. सो, जाहिर तौर पर काफी कुछ मामला उन छह पार्टियों पर निर्भर करेगा, जो खेल बनाने या बिगाड़ने की स्थिति में नजर आ रही हैं.

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