अरावली श्रेणी और पहाड़ प्रदेश

DoThe Best
By DoThe Best May 18, 2015 16:16

यह प्रदेश राजस्थान की मुख्य एंव विशिष्ट पर्वत श्रेणी है। यह विश्व की प्राचीनतम् पर्वत श्रृंखलाओं में से एक है। यह दक्षिण-पश्चिम में सिरोही से प्रारंभ होकर उत्तर-पूर्व में खेतड़ी तक तो श्रृंखलाबद्ध है और आगे उत्तर में छोटी-छोटी श्रृंखलाओं के रुप में दिल्ली तक विस्तृत है।

भू-गार्भिक इतिहास की दृष्टि से अरावली श्रृंखला धारवाड़ समय के समाप्त होने के साथ से संबधित है। यह श्रृंखला समप्राय: थी और केम्ब्रियन युग में पुन: उठी और विध्ययन काल के अंत तक यह पर्वत श्रृंखला अपने अस्तित्व में आयी। सर्वप्रथम यह श्रृंखला मेसाजोइक युग में समप्राय: हुई और टरशरी काल के प्रारंभ में पूर्व पुनरोत्थित हुई। इसका दक्षिण की ओर विस्तार जो इस समय समुद्र के नीचे है। टरशरी काल में दक्कन ट्रेप के एकत्रीकरण के पश्चात् हुआ। इस प्रदेश में फाइलाईट्स, शिष्ट, नीस और ग्रेनाइट चट्टानों की प्रधानता है। इस प्रदेश की ऊँचाई १२२५ मीटर है। इस पर्वत क्रम की चोटियों में गुरुशिखर (१७२७ मीटर) सर्वाधिक ऊँची है। अन्य में सेर (१५९७ मीटर), जरगा (१४३१ मीटर), अचलगढ़ (१३८० मीटर), रघुनाथगढ़ (१०५५ मीटर), खौ (९२० मीटर), तारागढ़ (८७३ मीटर), बाबाई (७९२ मीटर),
भैराच (७९२ मीटर) व बैराठ (७०४ मीटर) है। अरावली पर्वत श्रृंखला का विस्तार बाँसवाड़ा, सिरोही, जयपुर, अजमेर, सीकर और अलवर जिलों में है। इस पर्वत क्रम को चार भागों में बाँटा जा सकता है:-


१) उत्तरी-पूर्वी पहाड़ी श्रेणी,
२) मध्य अरावली श्रेणी – जिसे पुन: दो भागों में बाँटा जा सकता है:-

(अ) शेखावटी निम्न पहाड़ियाँ व (ब) मेरवाड़ पहाड़ियाँ

३) मेवाड़ पहाड़ियाँ और भोराट पठार तथा
४) आबू पर्वतक्रम।

१) उत्तरी-पूर्वी पहाड़ी प्रदेश – यह जयपुर जिले के उत्तरी-पश्चिमी भागों में तथा अलवर जिले के अधिकांश भागों में विस्तृत है। इस भाग में चट्टानी और प्रपाती पहाड़ियों के कई समानान्तर कटक सम्मिलित हैं। अरावली का यह भाग श्रृंखला-फाइलाईट और क्वार्टज से निर्मित है। इस प्रदेश की दिल्ली क्रम की अन्य चट्टानें चूने के पत्थर से निर्मित है। दिल्ली के दक्षिण में स्थित पहाड़ियों की ऊँचाई समुद्रतल से ३०६ मीटर है। अन्य प्रमुख श्रृंखलाओं भैराच (७९२ मीटर), बैराठ (७०४ मीटर) अलवर जिले में, बाबाई (७९२ मीटर), खौ (९२० मीटर) जयपुर जिले में, रघुनाथगढ़ (१०५५ मीटर), सीकर जिले में है।

२) मध्य अरावली पर्वत श्रेणी – यह अजमेर, जयपुर तथा ट्ैंक जिलों के दक्षिण-पश्चिम में स्थित है। यह अरावली पर्वत क्रम का मध्यवर्ती भाग है। इसके अन्तर्गत पश्चिम में बिखरे कटक, अलवर पहाड़ियाँ, करोली उच्च भूमि और बनास मैदान सम्मिलित है। इसे (अ) शेखावटी निम्न पहाड़ी प्रदेश और (ब) मेरवाड़ पहाड़ी प्रदेश में विभाजित किया जा सकता है।


(अ) शेखावटी निम्न पहाड़ी प्रदेश में सांभर झील से प्रारंभ होने वाली सबसे लंबी श्रेणी झुंझुनू जिले में सिहना तक जाती है। इनके अतिरिक्त अनेक छोटी-छोटी पहाड़ियां हैं जिनमें पुराना धाट, नाहर गढ़, आड़ा, डूंगर, राहोड़ी, तोरा वाटी आदि हैं। इन पहाड़ियों की औसत ऊँचाई ४०० मीटर है।
(ब) मेरवाड़ पहाड़ी प्रदेश मारवाड़ के मैदान को मेवाड़ के उच्च पठार से पृथक करने वाली पर्वत श्रेणी है जो अजमेर के निकट प्रकट होती है। इन पहाड़ियों में तारागढ़ (८७० मीटर) प्रमुख है जो अजमेर के निकट है। इसके पश्चिम में नाग पहाड़ है। संपूर्ण प्रदेश की औसत ऊँचाई ५५० मीटर है।


३) मेवाड़ पहाड़ियाँ और भौराट पठार – मेवाड़ पहाड़ियाँ और भौराट पठार वह हैं जो पूर्वी सिरोही, उदयपुर के पूर्व में संकीर्ण पट्टी को छोड़कर लगभग संपूर्ण उदयपुर और डूंगरपूर जिलों में विस्तृत है। इस भाग के पूर्व में अरावली हास्र्ट अथवा भ्रशोत्थ के रुप में १५३० मीटर तक है। इस भू-भाग में वलन की सामान्य संरचना उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम की ओर समनति वलनों के नति लम्ब के सहारे दृष्टिगोचर होती है। इस भाग की औसत ऊँचाई १२२५ मीटर है। जरगा पर्वत (१४३१ मीटर) यहां का सर्वाधिक ऊँचा शिखर है। भौराट पठार और उसकी समीपवर्ती कटकें संश्लिष्ठ गाँठ जैसा प्रतीत होता है। इस पठार के पूर्व की ओर कई पर्वत स्कन्ध हैं जिनमें दक्षिण सिरे का पर्वत स्कन्ध (५००-६०० मीटर) महत्वपूर्ण है।

४) आबू पर्वत क्रम – यह अरावली श्रृंखला के दक्षिण-पश्चिम में स्थित है। यह सिरोही जिले में पहाड़ियों के गुच्छे के रुप में विस्तृत है। इसकी प्रमुख विशेषता आबू के निकट प्राय: पृथक पहाड़ी के रुप में है। आबू पर्वत १९ किलोमीटर लंबा और ८ किलोमीटर चौड़ा है जो समुद्रतल से १२०० मीटर ऊँचा है। आबू से सटा हुआ उड़िया पठार आबू से लगभग १६० मीटर ऊँचा है और गुरु शिखर के मुख्य शिखर के नीचे है। गुरु शिखर (१७२७ मीटर), सेर (१५९७ मीटर) और अतलगढ़ (१३८० मीटर) आदि यहां के प्रमुख शिखर हैं। आबू के पश्चिम में आबू, सिरोही श्रेणियां है। यह आबू श्रेणियों की अपेक्षा बहुत नीची है और पश्चिम में जाने पर ये श्रेणियां छितरी पहाड़ियों के वर्ग के रुप में मिलती है और पालनपुर पहुँचते-पहुँचते सधन हो जाते है।

अरावली पर्वत प्रदेश पूर्व में आर्द जलवायु क्षेत्र तथा पश्चिम में शुष्क जलवायु क्षेत्र के बीच में स्थित होने के कारण एक संक्रमणक क्षेत्र है। आबू पर्वत पर गीष्म ॠतु में सुहावनी ठंडक होती है जबकि शीत ॠतु काफी ठण्ड़ी रहती है। प्राय: जनवरी में तापमान १०-१६ डिग्री से तथा जून में ३० डिग्री से अधिक रहता है। सापेक्षिक आद्रता ग्रीष्म ॠतु में २८ प्रतिशत रहती है। अरावली पर्वत प्रदेश में वर्षा की मात्रा उत्तरी और मध्य क्षेत्रों में ८० से.मी. तक तथा दक्षिणी भागों में आबू पर्वत पर १५० से.मी. पाई जाती है। इस पर्वत प्रदेश में मिश्रित पर्णपाती और उपोष्ण सदाबहार वनस्पति विहीन है। समान्यत: धौकड़ा, बरगद, गूलर, आम, जामून, बबूल व खैर आदि के वृक्ष पाए जाते हैं।

अरावली की उपादेयता – अरावली पर्वत विश्व के प्राचीनतम पर्वतों में से एक है। अत: भौगोलिक अध्ययन के लिए यहां पर्याप्त सामग्री उपलब्ध है। इसकी उच्चतम चोटी गुरु शिखर ग्रीष्मकाल में एक शीतल प्रदेश बन जाती है और भारत के मध्यवर्ती भाग में यह सबसे ऊँची चोटी है। इसके अतिरिक्त यह अरब सागर से उठने वाले मानसूनों को रोकता है जिससे इसके पूर्वी प्रदेश में वर्षा हो जाती है परंतु पश्चिमी प्रदेश शुष्क रह जाता है। अरावली पर्वत खनिजों का भी भण्ड़ार गृह है। यहां से इमारतों के लिए पत्थर, सड़कों के लिए पत्थर के छोटे-छोटे टुकड़े तथा अन्य उपयोगी खनिज प्राप्त किए जाते हैं। अरावली से कुछ नदियां निकलती है जो वर्षा ॠतु में बहती है और ग्रीष्मकाल में सूख जाती है। अरावली पर्वत के पूर्वी ढालों पर घने वन पाए जाते हैं जिनसे अनेक वस्तुएं उपलब्ध होती हैं जैसे जलाने व फर्नीचर के लिए लकड़ी, गोंद, लाख, शहद, मसाले आदि। अरावली के ढालों पर चारागाह भी बन गए हैं। अरावली पर्वत पर बहुत से दर्शनीय स्थल स्थित हैं, जैसे- माउण्ट आबू, चित्तौड़, आमेर, रणकपुर, हल्दी घाटी, आदि। अरावली से एक लाभ यह भी है कि यह पश्चिमी रेगिस्तान से चलने वाली रेतीले आँधियों को पूर्वी भाग में आने से रोकता है।

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