राजस्थान में किसान आंदोलन

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By DoThe Best November 17, 2017 15:20

राजस्थान में किसान आंदोलन

राजस्थान में किसान आंदोलन

यह आन्दोलन *1897-1941* तक चला  इसे भारत का *पहला अहिंसात्मक किसान आंदोलन* माना जाता है यह राजस्थान का *प्रथम संगठित किसान आंदोलन* था  बिजोलिया वर्तमान में *भीलवाड़ा* जिले में उसकी से इसे *ऊपरमाल की जागीर गांव* कहा जाता था   इस जागीर का संस्थापक *अशोक परमार*था जो *1527 के खानवा युद्ध* में राणा सांगा की ओर से लड़ने गया था
⛏ इस आंदोलन के 
*प्रणेता साधु सीताराम दास* से उन्होंने इस आंदोलन का *नेतृत्व*किया था यह आंदोलन *धाकड़ किसानों*द्वारा किया गया था इस आंदोलन की *शुरुआत 1897 में गिरधरपुरा गांव* में हुई थी जब किसानों के दो प्रतिनिधि *नानजी पटेल और ठाकरी पटेल मेवाड़ महाराणा फतेह सिंह* से मिलने उदयपुर गए थे
⛏ *1903 मे बिजोलिया के ठाकुर कृष्ण सिंह/किशन सिंह* की ने किसानों पर *चँवरी* नामक नया कर लगा दिया था इसके अंतर्गत किसानों को अपनी लड़की के विवाह पर *5रू (13 रुपए) ठिकाने  में जमा*करवाने पड़ते थे
⛏ नये राव पृथ्वी सिंह ने *1906* में किसानों पर *तलवार बंधाई (उत्तराधिकार शुल्क) और घुडपडी कर* लगा दिया  पृथ्वी सिंह के समय *मेवाड में 84 प्रकार की लागबाग लागत (लगान के अतिरिक्त शेष कर)* प्रचलित था
⛏ इस लागबाग लागत का *साधु सीताराम दास फतेहकरण चारण व ब्रह्मदेव ने 2 साल तक विरोध* किया और कोई कर नहीं दिया  1914 में सीतारामदास ने *विजय सिंह पथिक* को बिजोलिया आमंत्रित किया था *1914 में चित्तौड़ में विद्या प्रचारिणी सभा*का अधिवेशन हुआ था इस *सभा में विजय सिंह पथिक और हरिबाई किंकर* भाग लेने आए थे
⛏ *विजय सिंह पथिक1916*में इस आंदोलन से जुड़ गए थे

  • ? विजय सिंह पथिक का *वास्तविक नाम भूपसिंह* था 
  • ?यह बुलंदशहर के निकट *गुठावली*के रहने वाले थे
  • ? इन्हें *21 फरवरी 1915* को प्रस्तावित क्रांति में *अजमेर क्षेत्र में क्रांति करने*की जिम्मेदारी दी गई थी
  • ?क्रांति का *भंडाफोड़* होने के कारण *भूपसिंह को गिरफ्तार कर टाडगढ़ (ब्यावर)के किले* में नजर बंद कर दिया गया था
  • ?यहां से फरार हो कर इन्होंने *अपना नाम विजय सिह पथिक* कर लिया

⛏ *बिजोलिया आंदोलन* को गति देने के लिए पथिक ने *1917 में बिजोलिया में उपरमाल पञ्च बोर्ड* का गठन किया था जिसका *पहला सरपंच मन्ना पटेल*को बनाया गया था   *कानपुर* से प्रकाशित होने वाले *प्रताप नामक समाचार पत्र*के माध्यम से पथिक ने इस आंदोलन को *देशभर में चर्चित*कर दिया था 
⛏ महात्मा गांधी ने अपने
 *निजी सचिव महादेव देसाई* को किसानों की समस्या जाने के लिए बिजोलिया भेजा था  *1919 कांग्रेस अधिवेशन* में बिजोलिया आंदोलन का प्रस्ताव रखा गया था
⛏महाराणा फतेह सिंह ने
 *1919 में बिंदु लाल भट्टाचार्य*की अध्यक्षता में एक आयोग मेवाड़ भेजा था जिसमें *सीताराम दास और माणिक्य लाल वर्मा*को रिहा करने की बात कही थी  किसने *1919 में वर्धा (महाराष्ट्र)में राजस्थान सेवा संघ की स्थापना* की जिसे *1920 में अजमेर* स्थानांतरित कर दिया गया था इसी संस्था ने इस आंदोलन का संचालन किया था
⛏ कांग्रेस नेताओं के हस्तक्षेप से 
*1922  ई.ए.जी.जी. होलेंड व किसानों के बीच* समझौता हुआ जिसमें *84 में से 35 लाग माफ*कर दिए 1923 में पथिक को *विलियम ट्रेच*की रिपोर्ट पर गिरफ्तार किया गया था 1927 के बाद इस आंदोलन का नेतृत्व पथिक ने *फुर्सारिया ग्वालियर के पास मध्य प्रदेश* से किया था  1927 मैं जमुना लाल बजाज व हरिभाऊ उपाध्याय इस आंदोलन से जुड़े
⛏ इस आंदोलन से *माणिक्य लाल वर्मा हरिभाऊ उपाध्याय रामनारायण चौधरी जमुनालाल बजाज* आदि जुड़े हुए थ
⛏ 1931 मैं  जमनालाल बजाज व मेवाड़ के प्रधानमंत्री सुखदेव प्रसादके मध्य एक समझौता हुआ लेकिन यह समझौता सफल नहीं हुआ
⛏ *मेवाड़ के प्रधानमंत्री टी राघवाचारी जी*के प्रयासों से यह आंदोलन *1941* में समाप्त हो गया था
⛏ *1941* में मेवाड़ के प्रधानमंत्री TV राघवाचार्य ने *राजस्व विभाग के मंत्री डॉक्टर मोहन सिंह मेहता*को बिजोलिया भेज पर *किसानों की मांगे मान* कर उंहें जमीन वापस कर दी गई और इस *आंदोलन को खत्म* किया गया
*⛏1897* में बिजोलिया के अधिकांश *धाकड़ जाति*के किसान *गंगाराम धाकड़*की मृत्यु फौज में *गिरधारीपुरा गांव* में इकट्ठे हुए थे
*⛏हरियाली अमावस्या* के दिन 1917 में विजय सिंह पथिक द्वारा *उपरमाल पञ्च बोर्ड* की स्थापना की गई थी
*⛏1927* से बिजोलिया किसान आंदोलन के मुख्य नेता *माणिक्य लाल वर्मा* थे
*⛏अक्षय तृतीया के दिन 1932* को प्रातः 6:00 बजे *4000 किसानों*ने अपनी  *इस्तीफाशुदा* जमीनों पर हल चलाना प्रारंभ किया
⛏राजस्थान सेवा संघ द्वारा प्रकाशित *राजस्थान केसरी तथा नवीन राजस्थान* जैसे समाचार पत्रों में *बिजोलिया किसान आंदोलन के समर्थन* में क्रांतिकारी लेख छपे थे
⛏1941 में बिजोलिया किसान आंदोलन *जय हिंद एवं वंदे मातरम* के उद्घोष के साथ समाप्त हुआ.
⛏अंग्रेजी नियंत्रण से पूर्व *बिजोलिया की विशेष स्थिति* थी यह क्षेत्र *मराठा आक्रमण का सर्वाधिक शिकार*था जब भी मराठा मेवाड़ पर आक्रमण करते थे तो *बिजोलिया ठिकाना पहला शिकार* होता था
*⛏1894 मेरा गोविंद दास*की मृत्यु के उपरांत *किशन सिह* ठिकानेदार बनाओ जिसने किसानों के प्रति *नीति तथा जागीर के प्रबंधन* में परिवर्तन किया
⛏किसानों के *लाग के विरोध* से घबराकर *राव किशन सिह ने चँवरी लाग माफ* कर दिया इस विजय ने किसानों के *भावी असहयोग अहिंसात्मक आंदोलन* की आधारशिला रखी
*⛏पृथ्वी सिहं बिजोलिया का स्थाई निवासी नहीं* था इसलिए उसका बिजोलिया के किसानो के साथ कोई लगाव नहीं था और इस कारण उसने किसानों के साथ *निर्दयता पूर्वक व्यवहार किया और विभिन्न प्रकार के कर* लगाए पृथ्वी सिह *कामां (भरतपुर)* से बिजोलिया आया था इसका बिजोलिया के साथ कोई *परंपरागत संबंध* नहीं था
*⛏1919 में कांग्रेस के अमृतसर अधिवेशन* में बिजोलिया किसान आंदोलन संबंधित प्रस्ताव *बी जी तिलक* द्वारा रखा गया था किंतु *महात्मा गांधी व मदन मोहन मालवीय*के हस्तक्षेप के पश्चात यह प्रस्ताव वापस ले लिया गया
⛏बिजोलिया का *शुद्ध नाम विजयावल्ली* था बिजोलिया का *क्षेत्रफल* लगभग *100 वर्ग मील* था  बिजोलिया *उदयपुर राज्य* की *अ श्रेणी * की जागीर में से एक था बिजोलिया ठिकाने में *आंदोलन का मुख्य मुद्दा भू राजस्व निर्धारण और संग्रह की पद्धति*थी इस कार्य हेतु *लाटा एवं कुँता* पद्धति मुख्यतः प्रचलित थी  बिजोलिया आंदोलन *भारत वर्ष का प्रथम व्यापक और शक्तिशाली* किसान आंदोलन था
⛏बिजोलिया आंदोलन को *तीन चरणों में विभाजित* किया गया था 
[?] प्रथम चरण *1897 से 1915 तक रावकृष्ण सिंह “”चँवरी कर””*   1913 में बिजोलिया ठीकाने में *अकाल* पड़ा था  
[?] द्वितीय चरण *1916 से 1922 तक विजय सिंह*  बिजोलिया के *द्वितीय चरण* में *बारीसल* गांव में *किसान पंचायत बोर्ड* की स्थापना की गई पथिक* 
[?] तृतीय चरण *1923 से 1941* तक *माणिक्य लाल वर्मा और रामनारायण चौधरी*बिजोलिया आंदोलन के *तृतीय चरण* में *माणिक्य लाल वर्मा* द्वारा *1938 में मेवाड में प्रजामंडल*की स्थापना की गई थी


⛏ बिजोलिया ठीकाने का संस्थापक *अशोक परमार*का मूल निवास स्थान *जगनेर (भरतपुर)* था  पृथ्वी सिंह की मृत्यु के बाद उसके पुत्र *केसरसिह* के नाबालिक होने के कारण मेवाड़ सरकार ने ठिकाने पर *मुरसमात (कोटऑफ वार्ड्स)*कायम कर दी 1907* में प्रसिद्ध क्रांतिकारी *शचिंद्र सान्याल और रासबिहारी बोस* के संपर्क में आने के बाद *भूपसिहं (विजयसिह पथिक)* ने क्रांतिकारी गतिविधियों में भाग लिया 
इस आंदोलन के समय *माणिक्य लाल वर्मा जी* द्वारा रचित *पंछीड़ा गीत* गाया जाने लगा राजस्थान सेवा संघ के नेतृत्व में 8 अक्टूबर 1921 को बिना कूंता किसानों ने फसल काट ली थी जनवरी 1927*में मेवाड़ के *बंदोबस्त अधिकारी श्री ट्रेंस*बिजोलिया आए थे      


*⛏1913 बिजोलिया ठिकाने में अकाल* पड़ा था *साधु सीताराम दास, ब्रम्हा देव और फतहलाल चारण* के नेतृत्व में 1000 किसान राव से मिलने उनके घर गए पर *राव*ने मिलने से मना कर दिया इस कारण किसानो ने *जागीर की भूमि पर हल नहीं*चलाया बल्कि *मेवाड़ की खालसा भूमि, ग्वालियर तथा बूंदी रियासत की भूमि*किराए पर ले कर उस पर हल चलाया *इस कारण*बिजोलिया जागीर में *अकाल*पड़ा था       

⛏बिजोलिया में सूखा पड़ने के बावजूद भी *प्रथम विश्व युद्ध*के लिए किसानों से *वारफण्ड का चंदा* वसूला जा रहा था जिसके कारण किसानों में *असंतोष भडका*इसके इसलिए विजय सिंह पथिक ने इस *आंदोलन का नेतृत्व (भाग)* किया
*⛏24 नवंबर 1931* को बिजोलिया के किसानों ने *उमाजी का खेरा*की सभा में एक प्रस्ताव पारित किया यदि उन की  *असिंचित भूमि उन्हें वापस* मिल जाती है तो वह *मेवाड़ के प्रजामंडल के आंदोलन*में भाग नहीं लेंगे इसलिए *मेवाड़ सरकार* ने किसानों को *प्रजा मंडल के आंदोलन से दूर*रखने के लिए उनके *समझौते को स्वीकार* कर लिया पर *अगले 2 वर्ष तक* किसानो को कोई राहत नहीं दी गई

* [?] [?] बेगू किसान आंदोलन [?] [?] *
[?] बेगूँ आंदोलन *बिजोलिया किसान आंदोलन* की देन है  बिजोलिया किसान आंदोलन से प्रोत्साहित होकर *बेगू के किसानों* ने भी अत्याधिक *लाग,बाग, बैठ बेगार एवं लगान*के विरोध में आंदोलन करने का निर्णय लिया *बेगूँ किसान आंदोलन*की शुरुआत 
*1921 में मेनाल (भीलवाडा) के भेरु कुंड* नामक स्थान से हुई थी  इस आंदोलन का *नेतृत्व श्रीराम नारायण चौधरी* ने किया था  बेगू भी मेवाड़ रियासत का *प्रथम श्रेणी* का ठिकाना था  वर्तमान में *बेगू चित्तौड़गढ़ जिले*में स्थित है  बेगू किसानों ने अपने *जागीरदार के विरुद्ध*आंदोलन शुरू किया था ठाकुर *अनूप सिंह के द्वारा लगान में वृद्धि*किए जाने के विरोध में आंदोलन किया गया था  बेगू आंदोलन की *धाकड़ जाति के किसानों* द्वारा किया गया था


[?]  किसानों ने *श्री रामनारायण चौधरी के नेतृत्व*में निर्णय किया कि *फसल का कूँता* नहीं कराया जाएगा  सरकारी कार्यालयों और अदालतो*ं का बहिष्कार किया जाएगा *मई 1921* में बेगूँ ठीकाने के कर्मचारियों ने *चांदखेड़ी* नामक स्थान पर सभा में किसानों पर *अमानुषिक व्यवहार* किया 2 वर्षों के संघर्ष के बाद *1923 में बेगू के किसानों और ठाकुर अनूप सिंह* के मध्य *समझोता* हो गय मेवाड़ के महाराजा ने इस समझौते को *बोल्शेविक*की संज्ञा दी  बोल्शेविक एक *रूसी शब्द* है इसका अर्थ *बहुमत*होता है   इस आंदोलन के लिए *ट्रेंच आयोग का गठन* किया गया था लेकिन ट्रेंच आयोग ने *बिना जांच के* ही रिपोर्ट पेश कर दी थी  इस *ट्रेच आयोग का (जांच का)*किसानो ने *बहिष्कार* किया


* [?] 1923 में पारसोली (भीलवाड़ा)* नामक गांव में ठाकुर अनूप सिंह मैं किसानों की मांगों को स्वीकार कर लिया था  13 जुलाई1923* में किसानों ने स्थिति की पूर्नसमीक्षा के लिए *गोविंदपुरा गांव* में एक आम सभा का आयोजन किया गया इस *अहिंसक आम सभा*पर *13 July 1923 ट्रेंच* के आदेशानुसार लाठी चार्ज कर *गोलियां* चलाई गई इस गोलीबारी में *रूपा जी व कृपा जी* नामक *दो किसान शहीद*हुए  इस *अमानवीय कृत्य*की निंदा राष्ट्रीय स्तर तक हुई इस घटना के बाद इस आंदोलन का *नेतृत्व विजय सिंह पथिक* जी ने स्वयं संभाला 


[?] आंदोलन के कारण बन रहे दबाव के फलस्वरुप *बंदोबस्त व्यवस्था लागू* करके *lagaan की दरें कम* की गई और अधिकांश लागें वापस ली गई व *बेगार प्रथा*को समाप्त किया गयाविजय सिंह पथिक जी को *10 सितंबर 1923*को गिरफ्तार किया गया *साढे 3 वर्ष* के कारावास और *15000 के आर्थिक* जुर्माने से दंडित किया गया पथिक जी की *गिरफ्तारी के बाद* ही आंदोलन समाप्त हो गया

[?] बेगू किसान आंदोलन को दबा दिया गया लेकिन इस आंदोलन से *किसानों व जनता में राष्ट्रीय चेतना*की दृष्टि से और अधिक *जाग्रति* है किसानों ने *विजय सिह पथिक को आंदोलन का नेतृत्व* करने के लिए आमंत्रित किया था  पथिक जी द्वारा *राजस्थान सेवा संघ के मंत्री राम नारायण चौधरी*को बेगू आंदोलन का नेतृत्व सौंपा गया था  बेगूँ आन्दोलन जैसा *अत्याचार धंगडमउ, भंडावरी* में भी हुआ था मेवाड रियासत के *पारसोली, काछोला गॉव* में भी किसानों ने *भ्रष्टाचार के विरोध* आंदोलन किया था

* [?] [?] बूंदी किसान आंदोलन [?] [?] *  * [?] 1926-1943 [?] *

 बूंदी किसान आंदोलन की शुरुआत *1926 में पंडित नयनू राम शर्मा* के नेतृत्व में हुई थी  बूंदी किसान आंदोलन लगभग *17 सालों* तक चला था  बूंदी किसान* आंदोलन मुख्यत: *””राज्य””प्रशासन* के विरोध था बूंदी किसान आंदोलन को *बरड किसान आंदोलन* के नाम से भी जाना जाता है  बरड आंदोलन की *शुरुआत 1922-25* के मध्य हुई थी  बरड *डाबी के आसपास* के क्षेत्र हैं 


[?] बूंदी के दक्षिण पश्चिम में *मेवाड़ राज्य को स्पर्श करने वाला क्षेत्र भी*बरड के नाम से जाना जाता है  बरड क्षेत्र में *सर्वप्रथम अगस्त 
1920*में *साधु सीताराम दास*द्वारा *डाबी में किसान पंचायत* की स्थापना की गई थी  राजपुरा के *हरला भड़क* को किसान पंचायत का *पहला अध्यक्ष* बनाया गया थाबूंदी का किसान आंदोलन *बिजोलिया किसान आंदोलन* से प्रभावित व *राजस्थान सेवा संघ* से प्रोत्साहित था  राजस्थान सेवा संघ* के प्रोत्साहन के कारण परिणाम स्वरुप बूंदी के किसानों ने *सर्वप्रथम 1922*में *बूंदी सरकार के विरुद्ध* आंदोलन प्रारंभ किया 


[?] बूंदी रियासत का *बरड* किसान आंदोलन *राजस्थान सेवा संघ*के कार्यकर्ता 
*भवर लाल सोनी/सुनार*के नेतृत्व में प्रारंभ हुआ था
29 मई 1922 को लंबाखोह* नामक गांव में एक सभा आयोजित हुई थी  जिसमें लगभग *1000 किसान* पहुचे थे  [?] दूसरे दिन *30 मई 1922*को *निमाना में 4000 से 5000* के बीच किसान स्त्रियों सहित पहुंचे थे निमाना सभा में *राजस्थान सेवा संघ* के कार्यकर्ता बिजोलिया निवासी *भवरलाल सुनार “”प्रज्ञाचक्षु””*को राज्य पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था
 विजय सिंह पथिक ने इस आंदोलन का समर्थन किया था   बिजोलिया पद्धति पर *किसान पंचायत*का गठन किया गया बरड आंदोलन का संचालन *राजस्थान सेवा संघ*ने किया था    इस आंदोलन में लगभग *संपूर्ण बरड क्षेत्र में कर बंदी अभियान* का श्रीगणेश किया था 


[?] मई 1922 में बूँदी सरकार द्वारा *आर.बी.मदनमोहन लाल तथा महाराजा हरि नाथ सिंह* को किसानों की मांगों की जांच के लिए भेजा गया था 13 जून 1922* को सरकारी टुकड़ी ने *राजपुरा ,नरौली और लंबाखोह से 17 व्यक्तियों*को गिरफ्तार किया था
इन 17 व्यक्तियों को *गणेशपुरा गांव* में *महिलाओ*ं के एक दल ने मुक्त करवाने का प्रयास किया था इस *मुठभेड़ में 14 महिलाएं* गंभीर रुप से *घायल* हुई थी 


[?] राजस्थान सेवा संघ द्वारा इस घटना की जांच के लिए *रामनारायण चौधरी और सत्याभगत* को भेजा गया था
[?]  महिलाओं के साथ हुई *मुठभेड़ की जांच रिपोर्ट के आधार* पर राजस्थान सेवा संघ ने *बूंदी राज्य में महिलाओं पर अत्याचार नामक पुस्तिका* प्रकाशित की थी  ब्रिटिश सरकार द्वारा *अक्टूबर 1922* में ब्रिटिश सरकार की सेवा से निवृत *स्वरूप नारायण और संयुक्त प्रांत के पुलिस अधीक्षक इकराम हुसैन* को बूंदी भेजा गया था

[?]  *दिसंबर 1922*में रियासत ने उन समस्त व्यक्तियों की *जागीरें तथा संपत्ति जप्त* करने के आदेश दिए थे *जो किसानों की सहायता* कर रहे थेजब किसानों की *संपत्ति और जागीरें जब्त*की जा रही थी इस अवधि में *जागीरदार रणवीर सिह* का सक्रिय सहयोग था 
* [?] [?] डाबी हत्याकांड [?] [?] *
[?]  *डाबी एवं गराडा में 28 जुलाई 3 अगस्त 1922* की सभाओं में किसानों ने यह निर्णय किया था कि वह *राज्य के आदेश की अवहेलना*करेंगे और भुगतान करने पर भी राज्य *कर्मचारियों को खाद्य सामग्री उपलब्ध नहीं*कराएंगे  इस आंदोलन की चरम परिणति *2 अप्रैल 1923*को *डाबी में एक अप्रिय घटना* के रूप में हुई. 2 अप्रैल 1923*को डाबी में *किसान सभा* का आयोजन किया गया था 


[?] इस सभा में राजस्थान सेवा संघ के प्रतिनिधि *हरिभाई कीकर तथा भवन लाल स्वर्णकार प्रज्ञाचक्षु*ने भी भाग लिया था सभा में सर्वप्रथम 
*नानक देव ने विजयसिह पथिक द्वारा रचित झंडा गीत* गाया था  इस सभा की अध्यक्षता *नयनूराम शर्मा*ने की थी  इस सभा में *निर्णय* लिया गया था कि किसी भी प्रकार का *राजस्व* नहीं दिया जाए और किसी भी राज्य *अधिकारी* को किसी भी प्रकार का *सहयोग प्रदान ना* किया जाए 


[?]  इसी सभा के दौरान *बूंदी के पुलिस अधीक्षक इकराम हुसैन* द्वारा बिना किसी चेतावनी के गोली चलाने का आदेश दिया गया 
इस गोली कांड में *2 अप्रैल 1923* को *नानक भील और देवा गुर्जर नामक किसान* मारे गए नानक भील विजय सिह पथिक के साथ *झंडा गीत गाते*हुए शहीद हुए  इस अवसर पर *माणिक्य लाल वर्मा* ने उसी समय *नानक भील की याद*में एक गीत *अर्जी शीर्षक* से लिखा था   *नानक भील* राजस्थान का *एक प्रमुख शहीद* कहलाया  इस अवसर पर *भवरलाल स्वर्णकार ने भी अर्जी शीर्षक* से लोकगीत सुनाया था  10 मई 1923* को नयनूराम शर्मा को *राज्य विरोधी गतिविधियों के आरोप* में गिरफ्तार कर लिया गया और *4 वर्ष के कारावास* की सजा दी गई और रिहा होने के के बाद *राज्य में प्रवेश निषेध* कर दिया गया 1925 में बूंदी में किसान आंदोलन में *केवल याचिका प्रस्तुत करने का स्वरूप*धारण कर लिया था 


[?] किसानों की ओर से यह याचिकाएँ *राजस्थान सेवा संघ* प्रस्तुत कर रहा था याचीकाएँ प्रस्तुत करने के उपरांत *नयनूराम शर्मा को राजस्थान सेवा संघ की हाडौती* शाखा का अध्यक्ष बना कर उसका *मुख्यावास कोटा*रखा गया   1926* के उपरांत *राजस्थान सेवा संघ की गतिविधिया*संपूर्ण राजस्थान में कमजोर पड़ने लगी 1927*के बाद राजस्थान सेवा संघ ही *अंतर्विरोधों*के कारण *बंद*हो गया था  राजस्थान सेवा संघ के साथ ही *बूंदी के बरड क्षेत्र का किसान आंदोलन* समाप्त हो गया था  इस आंदोलन में महिलाओं के साथ *दुर्व्यवहार*भी किया गया था  बरड किसान आंदोलन में *महिलाओं ने भी उत्साह* से भाग लिया था


* [?] [?] गूजरों का आंदोलन [?] [?] * [?] 1936-45 [?] *
[?] यह आंदोलन *गुर्जर समुदाय* के लोगो द्वारा किया गया  गुर्जर समुदाय के लोगों में अनेक *कष्टदायक करों व राज्य द्वारा उनके सामाजिक मामलों में हस्तक्षेप* को लेकर आक्रोश व्याप्त था  
1936 में बरड क्षेत्र* में पुन:आंदोलन प्रारंभ हो गया  *21 अक्टूबर 1936*को बूँदी सरकार ने *अपराध कानून संशोधन अधिनियम 1936* पारित किया था  1936* में बूँदी सरकार द्वारा *मृत्युभोज पर कानूनी पाबंदी* लगा दी गई थी  पशु की गिनती की सरकारी कार्रवाई*ने गुर्जरो के मन में आकांक्षा उत्पन्न कर दी थी कि उनके ऊपर *चराई कर*लगाया जा सकता है भारी राजस्व की दर व गैर कानूनी लागों* के विरोधी भी थे गुर्जर 


[?]  गुर्जर राज्य की *कृषि विस्तार नीति*के विरोधी थे क्योंकि *अधिक भूमि जोत* में आने से *पशु चराने के लिए कम भूमि*उपलब्ध रहने की संभावना है इन सभी कारणों से 
*5 अक्टूबर 1936 को हिंडोली*में *हुडेश्वर महादेव* के मंदिर पर *गुर्जर मीणा और अन्य पशुपालको व किसानों*की एक सभा हुई  जिसमें *90 गांवों के लगभग 500 व्यक्ति*सम्मिलित हुए थे  सभा के पटेलों ने अपना एक *मांग पत्र प्यार कर हिंडोली के तहसीलदार* के समक्ष प्रस्तुत किया उनकी मांग पत्र के *मुख्य बिंदु,चराई करो को समाप्त करना/कम करना, पशुपालको की सहूलियते*उपलब्ध कराना था बूंदी के दीवान *7 नवंबर 1936* को एक आयोग नियुक्त किया 


[?] जिसमें *राज्य कौंसिल के न्याय राजस्व व गृह सदस्य* को सम्मिलित किया गया था इस आयोग को *हिंडोली के गुर्जर किसानों की शिकायतों*की जांच का दायित्व सौंपा गया था 1939 में *गुर्जरों का आंदोलन लाखेरी* से प्रारंभ हुआ था  3 सितंबर 1939* को *40 गांव के लगभग 150 गुर्जरों*ने लाखेरी में *तोरण की बावरी* पर एक सभा की थी जिसका नेतृत्व *भवरलाल जमादार एक राज्य कर्मचारी गोवर्धन चौकीदार सीमेंट फैक्ट्री के कर्मचारी रामनिवास तंबोली* ने किया था  


* [?] 1943 में पुन:हिन्डोली क्षेत्र*मे गुर्जर आन्दोलन प्रारम्भ किया गया 5 Jan 1943 को 60 गॉवो*के गुर्जर ने के महाराजा के समक्ष ज्ञापन भेजा था 11 अक्टूबर 1943* को बूंदी के दीवान ने इस मुद्दे पर निर्णय लेते हुए अधिसूचना जारी की कि *शुल्क मुक्त चराई की छूट किसान की जोत के  अनुपात में प्रदान* की जाएगी  इस आन्दोलन का *मुख्य उद्देश्य चराई कर*था  *1945 के अंत तक बूंदी आंदोलन* खत्म हो गया


* [?] [?] अलवर  आंदोलन [?] [?] *
[?] अलवर रियासत में *जन जागृति का प्रारंभ किसान आंदोलन*को ही माना जाता है अलवर में *80% भूमि खालसा* के अंतर्गत थी जबकि केवल *10% भूमि जागीरदारों*के नियंत्रण में थी  यह एकमात्र *किसान आंदोलन था जो खालसा क्षेत्र*में चलाया गया था अलवर, भरतपुर के अधिकांश किसानों को *खालसा क्षेत्रों में स्थाई भू स्वामित्व* के अधिकार प्राप्त थे जिन्हे *विश्वे्दारी*कहते थे अलवर-भरतपुर में भू-राजस्व की सबसे *बदतर पद्धति इजारा* प्रचलित थी ब्रिटिश पद्धति पर अलवर में पहला भूमि बंदोबस्त 1876 में किया गया था
[?] अलवर में *दो बार*आंदोलन हुआ था 

  •  पहला आंदोलन 1921* में हुआ था
  •  दूसरा आंदोलन *1923-24*में हुआ था 

[?] अलवर के शासक *जयसिंह* द्वारा *जंगली सूअरों*को मारने पर *प्रतिबंध*लगाने के कारण *1921 में अलवर* में आंदोलन किया गया था अलवर रियासत में *जंगली सुअरों को अनाज खिलाकर रोधो*में पाला जाता था यह सूअर किसानों की *खड़ी फसल को बर्बाद*कर देते थे और इसके बदले किसानों को *कोई मुआवजा नहीं*मिलता था किसानों ने परेशान होकर *1921 में सूअर मारने की अनुमति*के लिए यह आंदोलन प्रारंभ किया था  महाराजा को *किसानों की बात को मानना*पड़ा और *सूअर पालने के रोधों* को समाप्त कर दिया गया और *किसानों को सूअर मारने की अनुमति*प्रदान की गई 


* [?] दूसरा आंदोलन 1923-24* में *भू-राजस्व में भारी वृद्धि* के कारण *नीमूचाणा* अलवर में शुरू हुआ था 


* [?] [?] नीमूचाणा हत्याकांड [?] [?] * 
[?] अलवर रियासत में 1924 में *भूमि बंदोबस्त* हुआ था   lagaan की दरों को *पुनः मूल्यांकन* कर लगान की दरों में *40% की वृद्धि* कर दी गई  इस कारण *भू राजस्व में भारी वृद्धि* हो गई राजपूत किसानों को *पूर्व में प्राप्त रियासतों*को समाप्त कर दिया गया भूमि लगान वृद्धि तथा राजपूत किसानों की रियासतों*की समाप्ति के खिलाफ *खालसा क्षेत्र के राजपूत* किसानों ने *1924* में आंदोलन की शुरुआत की 


[?] इस आंदोलन का *नेतृत्व माधोसिह और गोविंद सिंह* ने किया था इस आंदोलन का *मुख्य केंद्र नीमूचाणा* था अलवर के किसानों ने *1925 में दिल्ली* में एक सभा आयोजित की गई थी जिसमें *200 राजपूत किसानो*ं ने भाग लिया यहीं से *पुकार नामक पुस्तिका* में *किसानों की समस्याओं को प्रकाशित* किया गया था अलवर के महाराजा ने किस मामले की जांच हेतु *7 मई 1925* को एक आयोग गठित किया था 


[?] अलवर के किसान अपनी 
*समस्याओं*को लेकर *नीमूचाणा* नामक स्थान पर एकत्रित हुए थे  इसी स्थान पर *14 मई 1925* को *छाजू सिंह नामक अंग्रेजी कमांडर*द्वारा सभा में *गोलियां चलाई*गई और पूरे गांव को जला दिया गया घटना में *सैकडो किसान मारे* गए थे इस घटना को *इतिहास में नीमूचाणा हत्याकांड* के नाम से जाना जाता है नीमूचाणा हत्याकांड की देशभर में आलोचना की गई महात्मा गांधी* ने इसे *जलियांवाला बाग हत्याकांड* की घटना बताते हुए इसे *दोहरी डायरशाही* कहा था

[?]  *राजस्थान सेवा संघ*ने इस मामले में जांच की तथा इस जाचँ की पूरी कहानी *31 मई 1925* को *तरूण राजस्थान* के अंक में प्रकाशित की गई थी इस घटना की जाचँ से *अजमेर के रामनारायण चौधरी* भी जुड़े हुए थे देसी राज्य* के इतिहास में इस घटना का वही *महत्व* है जो भारत में *जलियांवाला बाग हत्याकांड* का है इस हत्याकांड का असली खलनायक *गोपाल दास*नामक *पंजाबी अधिकारी* को माना जाता है अलवर *नरेश जयसिंह*स्वयं नीमूचाणा आये और  मारे गए लोगों के परिवार को *मुआवजा*दिया गया और 18 नवंबर 1925* को पुरानी दर से लगान वसूलने के आदेश दिए गए  इन आंदोलनों ने ही *प्रजामंडल आंदोलन*के लिए जमीन तैयार की थी


* [?] [?] सीता देवी [?] [?] *
[?] अलवर रियासत के नीमूचाणा के *किसान रघुनाथ की बेटी*थी सीतादेवी ने *अलवर किसान आंदोलन* में भाग लिया था  अंग्रेजों द्वारा *नीमूचाणा गांव* में किसानों पर गोलियां बरसाने के समय *सीता देवी ने किसानों को ललकारा* था सीता देवी ने “”किसानों से कहा”” कि *हम किसी भी हालत में ठिकानों को अधिक लगान नहीं देंगे* नीमूचाणा हत्याकांड अलवर नरेश *जयसिंह प्रजापालक को बदनाम* करने के लिए रचा था क्योकी *अंग्रेज*जयसिंह को *पसंद नही*ं करते थे  जवाहरलाल नेहरु ने महाराजा जयसिंह* के लिए कहा था अगर *यह युवक राज परिवार में जन्म ना लेकर किसी सामान्य वर्ग में जन्म लेता* तो भारतवर्ष को एक बड़ा *नेता*प्राप्त होता

* [?] [?] भरतपुर किसान आंदोलन [?] [?] *
[?] भरतपूर राज्य में किसानों की *दशा अच्छी*थी  भरतपुर में *95% भूमि सीधे राज्य के नियंत्रण* में थी  5% भूमि राज्य से अनुदान* प्राप्त छोटे *जागीरदारों को माफीदारों*के पास थी भरतपुर रियासत में *5 जातियां ब्राह्मण जाट गुर्जर अहीर व मेव*सामान्य हैसियत रखते थे  भरतपुर राज्य में *खालसा भूमि* के अंतर्गत *लंबरदार व पटेल व्यवस्था* अस्तित्व मान थी  इसके अंतर्गत लंबरदार व पटेल *भू राजस्व* की वसूली के लिए जिम्मेदार थे भरतपुर राज्य में *1931 में नया भूमि बंदोबस्त लागू* किया गया इस नए भूमि बंदोबस्त के कारण *भू राजस्व में वृद्धि* हो गई  भू राजस्व अधिकारी लंबरदारों*ने इस बढेे हुए *भू राजस्व* के विरोध में *1931*में आंदोलन शुरु किया

[?] नये *बंदोबस्त*से किसानों में असंतोष व अशांति उत्पन्न कर दी  लंबरदार व पटेलों को *भू राजस्व वसूली* में बड़ी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा था  इस कारण *लंबरदार एवं पटेल*बढ़े हुए *राजस्व के मुददे के विरुद्ध लड़ने के लिए आगे आए *23 नंबर 1931* को *भोजी लंबरदार* के नेतृत्व में 500 किसान *भरतपुर*में एकत्रित हुए भोजी लंबरदार* ने राज्य के *विरोध भड़काऊ भाषण* देने के कारण *भोजी लंबरदार को नवम्बर मे गिरफ्तार* कर लिया गया भोजी लंबरदार की गिरफ्तारी के साथ 1931*में ही यह *आंदोलन समाप्त* हो गया


* [?] [?] अलवर भरतपुर मेव आंदोलन [?] [?] *
* [?] हिंदू धर्म से परिवर्तित* मुसलमान किसान मेव कल आते हैं  अलवर मे 
*मेव जाति*का *पहला आंदोलन 1921*में प्रारंभ हुआ था
मेवो ने प्रारम्भ से ही
 *गुरिल्ला युद्ध* आरंभ कर दिया था  अलवर भरतपुर क्षेत्र को *मेवाती क्षेत्र*करते हैं  अलवर भरतपुर में आंदोलन की शुरुआत *1932* में हुई थी इस आंदोलन का *नेतृत्व डॉक्टर मोहम्मद अली*ने किया था अलवर भरतपुर रियासत के *मेव किसानो*ं ने बड़ी हुई *lagaan देने से इंकार* कर दिया मेवो ने *बांध व सड़क बनाने घास काटने संघो की सफाई करने और बेगार समाप्त*करने की मांगों के लिए आंदोलन किया था अलवर के मेव किसान आंदोलन का नेतृत्व *गुडगांव के मेव नेता चौधरी यासिन खान* द्वारा किया गया था 


[?] इतिहासकारों के अनुसार *यह आंदोलन कालांतर में सांप्रदायिक प्रभाव*में भी आ गया था अलवर भरतपुर क्षेत्र मे 
*मोहम्मद हादी ने1932 में अंजुमन खादिमुल इस्लाम नामक संस्था* स्थापित की थी  इस संस्था ने मेव किसानों को *संगठित* किया और मेव जाति के लोगों में *जन जागृति लाने*का कार्य किया  चौधरी यासीन खान के नेतृत्व में मेव लोगों ने *खरीफ फसल का लगान देना बंद* कर दिया अंजुमन खादिमुल इस्लाम संस्था*ने अलवर के महाराजा से *उर्दू की शिक्षा के प्रसार, मुसलमानों के लिए पृथक शिक्षण संस्थाओ की स्थापना और मस्जिदों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त*करने की मांग की थी*दिसंबर 1932* में अलवर रियासत में मेव किसानों की *आर्थिक परेशानी की जांच* के लिए एक समिति का गठन किया  मेव किसानों ने इस *समिति का बहिष्कार* किया   मेवो ने *1933 में गोविंदगढ़*में सरकारी सेना पर आक्रमण कर दिया


[?]  मेवो को संतुष्ट करने के लिए *राज्य काँन्सिल* में एक मुस्लिम सदस्य *खान बहादुर काजी अजीजुद्दीन बिलग्रामी* को सम्मिलित कर लिया था  खान बहादुर काजी अजीजुद्दीन बिलग्रामी को सम्मिलित करने के बाद भी *आंदोलन खत्म नहीं*हुआ बल्कि और *उग्र*हो गया 
1933 में सेना ने नगर तहसील के *सोमलाकला व झीतरहेडी गांव* को घेरकर बलपूर्वक राजस्व वसूल कर *बंदी अभियान* को कुचल दिया  राजस्व  व पुलिस प्रशासन हेतु *ब्रिटिश अधिकारी*नियुक्त कर दिए गए *मई 1933 में महाराजा जयसिंह* को गद्दी से हटाकर राज्य से निर्वासित कर दिया गया 1933 में राज्य द्वारा *भू राजस्व संबंधी छूटों*के बाद विद्रोह दब गया खरीफ के लगान में *25%* और रबी के लगान *50%* की छूट प्रदान की गई भरतपुर राज्य के मेवो ने भी *1933 में लगान देना बंद* कर दिया पर *दमन के कारण* आंदोलन असफल रहा 1934* में मेवो को सुविधा देने के उद्देश्य से सरकार द्वारा *अजीजुद्दीन बिलग्रामी की अध्यक्षता में एक समिति का गठन* किया गयाइस समिति की रिपोर्ट के आधार पर *मेवो को भू-राजस्व तथा अन्य करो में छूट के साथ-साथ सामाजिक व धार्मिक समस्याओं का समाधान* भी किया गया


 * [?] [?] बीकानेर किसान आंदोलन [?] [?] *
[?] सिंचाई सुविधा हेतु
 *1929 में नहरी क्षेत्र के जमीदार संघ* द्वारा यह आंदोलन शुरू किया गया था  सरकार द्वारा  किसानों से पूर्ण *आबियाना {सिंचाई कर}*वसूल किया जा रहा था लेकिन *पूर्ण जल उपलब्ध* नहीं करवाया जा रहा था 19 अप्रैल 1929 में जमीदार एसोसिएशन का गठन किया गया * दरबार सिह* को जमींदार एसोसिएशन का *अध्यक्ष*नियुक्त किया गया इस *(जमीदार एसोसिएशन) संगठन के निर्माण के साथ ही क्षेत्र के किसानों ने आंदोलन*किया था सबसे पहले 10 मई 1929* को श्री गंगानगर में आयोजित *जमींदार एसोसिएशन की बैठक में अपनी समस्याओं* का एक मांग पत्र तैयार किया गया था जमीदार एसोसिएशन *1929 से आरंभ होकर 1947*तक अपने सदस्यों के हितो को पूरा करती  है और इसकी *गतिविधिया संवैधानिक को शांतिपूर्ण* थी 


* [?] 1934*में किसानों ने *जागीरदारों द्वारा लगाई गई लागतों के विरोध* बीकानेर के *महाराजा गंगा सिंह* को एक प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया गया प्रार्थना पत्र में निवेदन किया कि जब तक उनकी *मांगों को नहीं माना* जाएगा तब तक वह *लगान नहीं देंगे* मांग पत्र के आधार पर *1934 में जाट किसानों*ने *लागे*देना बंद कर दिया महाराजा गंगासिह*ने लगान नहीं देने को *घोर अपराध*घोषित कर दिया था और इस अपराध की *जमानत भी नहीं*दी जा सकती थी  दमनचक्र चलाकर किसानों की *निजी संपत्ति जप्त* कर ली गई *1937 में उदासर*के किसानों के समर्थन में *बिकानेर प्रजामंडल*ने आवाज उठाई और *बेगार*को समाप्त करने की मांग की किसान आंदोलन की शुरुआत *सर्वप्रथम 1937 में उदासर* के किसानों ने की थी  यहां के *किसान नेता जीवन चौधरी* ने बीकानेर किसानों की समस्याएं *महाराजा और अन्य अधिकारियों*के समक्ष प्रस्तुत की थी पर इसका कोई *परिणाम नहीं* निकला यह आंदोलन *जातिवाद से मुक्त*था जागीरदार लगभग *37  प्रकार की लाग-बाग* किसानों से लेते थे बिकानेर में मूल रूप से *लाग बाग व बेगार के विरोध*में किसान आंदोलन आरंभ हुआ था बीकानेर के किसानों की *68.7% भूमि सामंतो* के अधिकार में थी जिन्हें *ठिकाना अथवा जागीर* कहा जाता था


* [?] [?] महाजन ठिकाने का किसान आंदोलन [?] [?] *
* [?] महाजन*बीकानेर राज्य का *प्रथम श्रेणी*का ठिकाना था महाजन ठिकाने को *विशेष प्रशासनिक अधिकार*प्राप्त थे  महाजन के किसानों ने *दीवान (प्रधानमंत्री)*को शिकायत की कि भूराजस्व तथा चराई की दरें *खालसा क्षेत्र*के समान निश्चित की जाए किसानों की समस्या के संदर्भ में *बिकानेर राज्य की ओर से कोई विशेष प्रगति* नहीं हुई  बीकानेर सरकार ने *बकाया राशि में छूट* की घोषणा की  इस कारण *दिसंबर 1942*के अंत तक *महाजन ठिकाने का किसान आंदोलन* को लेकर शांत हो गया


* [?] [?] दूधवाखारा किसान आंदोलन [?] [?] *
* [?] दूधवाखारा* किसान आंदोलन *बीकानेर रियासत* में चलाया गया था  
वर्तमान में *दूधवाखारा चूरु जिले*में स्थित है  दूधवाखारा के जागीरदार *सूरजमल के अत्याचार* के विरोध में *हनुमान सिह और मद्याराम वैद्य* के नेतृत्व में यह आंदोलन चलाया गया  सूरजमल* ने *हनुमान सिह को अनुपगढ किले*में कैद कर लिया था  *हनुमान सिह* ने अनूपगढ़ किले में *65 दिनों*तक भूख हड़ताल की थी  1944*में यहां के जागीरदारों ने बकाया राशि के भुगतान का बहाना कर अनेक किसानों को उनकी *जोत से बेदखल* कर दिया गया था  चौधरी हनुमान सिंह के नेतृत्व*में किसानों का एक प्रतिनिधिमंडल *2 जून 1945*को *माउंट आबू में महाराजा सार्दुल सिंह*से मिला था 


[?] हनुमान सिंह को *रतनगढ़*में गिरफ्तार कर उनके विरुद्ध *राजद्रोह* का मुकदमा चलाया गया था   4 जनवरी 1948*को उन्हें जेल से रिहा कर दिया गया था बीकानेर के किसान आंदोलन के इतिहास में दूधवाखारा का किसान आंदोलन सबसे *अधिक महत्वपूर्ण और निर्णायक* अन्त था दूधवाखारा आंदोलन में *कहीं महिलाओं*ने भाग लिया था  दूधवाखारा किसान आंदोलन में
 *महिलाओं का नेतृत्व खेतु बाई*ने किया था


* [?] [?] बीकानेर राज्य प्रजा परिषद के नेतृत्व में किसान आंदोलन [?] [?] *
[?] बीकानेर प्रजा परिषद के नेतृत्व में *दूसरा किसान आंदोलन रायसिंहनगर की घटना* को लेकर हुआ था  1 जुलाई 1946* को प्रजा  परिषद् के नेतृत्व में *रायसिहनगर* में एक *जुलूस* निकल रहा था इस जुलूस को *पुलिस व सेना के बल* पर इसे कुचलने की नाकाम कोशिश की गई थी  इस सैनिक कार्यवाही में *एक कार्यकर्ता बीरबल सिंह*की मृत्यु हो गई थी  प्रजा परिषद ने *6 जुलाई 1946* को संपूर्ण बीकानेर राज्य में *किसान दिवस* मनाया था


* [?] [?] कांगड काण्ड [?] [?] *
[?] बीकानेर के किसान आंदोलन के इतिहास की *अंतिम व महत्वपूर्ण घटना कांगड़ कांड (रतनगढ)* थी यह आंदोलन *जागीरदारों के अत्याचारों* से उपजा *स्वस्फूर्त* किसान आंदोलन था 1946* मे खरीब की *फसल नष्ट* होने के कारण *अकाल* की स्थिति पैदा हो गई थी  अकाल पड़ने के बाद भी *1946* में किसानों से कर वसूली का प्रयास किया गया था जिसके कारण किसानों ने *आंदोलन* किया कांगड़ के लगभग *35 किसान महाराजा*को याचिका प्रस्तुत करने *बिकानेर* पहुंचे जागीरदारों के आदमियों ने उस गांव के किसानों के साथ *खुलकर लूटपाट की पुरुष महिला और बच्चों*को गढ में ले जाया गया जहां पर उनके साथ *अमानवीय अत्याचार*किए गए 1948* में बिकानेर में *उत्तरदायी शासन* की स्थापना हुई  30 मार्च 1949* को बीकानेर राज्य के *राजस्थान* में विलय के साथ ही बिकानेर में *राजतंत्र व सामंतवाद* को *अंतिम रूप से विदा*कर दिया गया था इस कार्य में *किसान आंदोलनों की निर्णायक* भूमिका रही20 फरवरी 1944* को अलवर में *स्वतंत्रता दिवस* मनाया गया 5 फरवरी 1947*को *भरतपुर में प्रजा परिषद* के नेतृत्व में *बैगार विरोधी दिवस* मनाया गया

DoThe Best
By DoThe Best November 17, 2017 15:20
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