वसुंधरा राजे नहीं देंगी इस्तीफा, दिल्ली रवाना

DoThe Best
By DoThe Best June 27, 2015 09:55

वसुंधरा राजे नहीं देंगी इस्तीफा, दिल्ली रवाना

ललित मोदी विवाद मामले में राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे इस्तीफा नहीं देंगी। वहीं राजे नीति आयोग की बैठक में शामिल होने के लिए दिल्ली रवाना हो गई हैं। राजस्थान भाजपा ने आईपीएल के पूर्व कमिश्नर ललित मोदी की मदद के लिए मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की ओर से दिए दस्तावेज की कानूनी प्रमाणिकता जीरो बताते शुक्रवार को उनका बचाव किया। पार्टी ने कहा, उस समय ललित मोदी और राजे पर कांग्रेस की ओर से लग रहे आरोप और देश की राजनीतिक स्थिति को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उछलने से बचाने के लिए ड्राफ्ट को गोपनीय बनाए रखने को कहा गया था।

प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी व चिकित्सा मंत्री राजेंद्र राठौड़ ने प्रेस वार्ता कर कहा, राजे के जो दस्तावेज मीडिया में दिखाए गए, उनके अध्ययन से सामने आया कि जिस समय ड्राफ्ट तैयार कराया था, तब मोदी को ईडी नोटिस जारी नहीं हुआ था। न ही मोदी को भगोड़ा घोषित किया था। राजे ने मोदी से पारिवारिक संबंध कभी नकारे भी नहीं। यूपीए सरकार ने मोदी के विरूद्ध एक बार भी कार्रवाई नहीं की। एनडीए ने 15 नोटिस जारी किए। रॉबर्ट वाड्रा और प्रियंका गांधी से ललित मोदी के मिलने का कारण समझ आ ही गया है।

राठौड़ ने कहा, पुर्तगाल के साथ जो एमओयू किया है, वह जनहित के लिए था। ऎसा एमओयू एक बार नहीं, बार-बार होगा। एमओयू से पहले कैंसर संस्थान की स्थापना के लिए कमेटी गठित की थी। इस कमेटी ने सोनिया गांधी का इलाज करने वाले अमरीकी अस्पताल, पुर्तगाल और टाटा मेमोरियल अस्पताल का अध्ययन किया था। फिर एमओयू किया गया। कांग्रेस की ओर से उठाया स्वामित्व का सवाल सही नहीं है। अस्पताल को जमीन का आवंटन नहीं हुआ। जमीन राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय को आवंटित की है। इसका मालिकाना हक सरकार के पास है। पुर्तगाल के अस्पताल के आर्थिक लाभ देने की बात भी गलत है। अस्पताल सिर्फ तकनीकी सहयोग करेगा। प्रदेश में कैंसर अस्पताल की सख्त जरूरत है। हर वर्ष 30-40 हजार नए मरीज आ रहे हैं। पुर्तगाल के अस्पताल में 80 प्रतिशत मरीजों का इलाज हो रहा है।

अनावश्यक तूल दे रही कांग्रेस : परनामी

परनामी ने कहा, यह ड्राफ्ट सिर्फ एक स्टेटमेंट था लेकिन इसे साक्ष्य बनाने को राजे कभी लंदन की कोर्ट में नहीं गई और न ही अन्य तरीके से साक्ष्य बनाने को कहा। यूके सिविल प्रोजिसर रूल्स 1998 में ड्राफ्ट के प्रमाणीकरण के लिए कोर्ट में स्टेटमेंट देना जरूरी है। ड्राफ्ट किसी कोर्ट को संबोधित नहीं था। कांग्रेस अनावश्यक तूल दे रही है। ड्राफ्ट के दस्तावेज में सिर्फ एक पर ही राजे के हस्ताक्षर हैं।

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By DoThe Best June 27, 2015 09:55
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