भारतीय चित्रकारी की शैलियां

DoThe Best
By DoThe Best May 18, 2015 16:05

भारतीय चित्रकारी के प्रारंभिक उदाहरण प्रागैतिहासिक काल के हैं, जब मानव गुफाओं की दीवारों पर चित्रकारी किया करता था। भीमबेटका की गुफाओं में की गई चित्रकारी 5500 ई.पू. से भी ज्यादा पुरानी है। 7वीं शताब्दी में अजंता और एलोरा गुफाओं की चित्रकारी भारतीय चित्रकारी का सर्वोत्तम उदाहरण हैं।
भारतीय चित्रकारी में भारतीय संस्कृति की भांति ही प्राचीनकाल से लेकर आज तक एक विशेष प्रकार की एकता के दर्शन होते हैं। प्राचीन व मध्यकाल के दौरान भारतीय चित्रकारी मुख्य रूप से धार्मिक भावना से प्रेरित थी, लेकिन आधुनिक काल तक आते-आते यह काफी हद तक लौकिक जीवन का निरुपण करती है। आज भारतीय चित्रकारी लोकजीवन के विषय उठाकर उन्हें मूर्त कर रही है।

भारतीय चित्रकारी को मोटे तौर पर भित्ति चित्र व लघु चित्रकारी में विभाजित किया जा सकता है। भित्ति चित्र गुफाओं की दीवारों पर की जाने वाली चित्रकारी को कहते हैं, उदाहरण के लिए अजंता की गुफाओं व एलोरा के कैलाशनाथ मंदिर का नाम लिया जा सकता है। दक्षिण भारत के बादामी व सित्तानवसाल में भी भित्ति चित्रों के सुंदर उदाहरण पाये गये हैं। लघु चित्रकारी कागज या कपड़े पर छोटे स्तर पर की जाती है। बंगाल के पाल शासकों को लघु चित्रकारी की शुरुआत का श्रेय दिया जाता है।

अजंता की गुफाएं
इन गुफाओं का निर्माणकार्य लगभग 1000 वर्र्षों तक चला। अधिकांश गुफाओं का निर्माण गुप्तकाल में हुआ। अजंता की गुफाएं बौद्ध धर्म की महायान शाखा से संबंधित हैं।

एलोरा की गुफाएं
हिंदू गुफाओं में सबसे प्रमुख आठवीं सदी का कैलाश मंदिर है। इसके अतिरिक्त इसमें जैन व बौद्ध गुफाएं भी हैं।

बाघ व एलीफेटा की गुफाएं
बाघ की गुफाओं के विषय लौकिक जीवन से सम्बन्धित हैं। यहां से प्राप्त संगीत एवं नृत्य के चित्र अत्यधिक आकर्षक हैं।
हाथी की मूर्ति होने की वजह से पुर्तगालियों ने इसका नामकरण एलीफेन्टा किया।

जैन शैली
इसके केद्र राजस्थान, गुजरात और मालवा थे।  देश में जैन शैली में ही सर्वप्रथम ताड़ पत्रों के स्थान पर चित्रकारी के लिए कागज का प्रयोग किया गया। इस कला शैली में जैन तीर्र्थंकरों के चित्र बनाये जाते थे। इस शैली पर फारसी शैली का भी प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है। नासिरशाह (1500-1510 ई.) के शासनकाल में मांडू में चित्रित नीयतनामा के साथ ही पांडुलिपि चित्रण में एक नया मोड़ आया।

पाल शैली
यह शैली 9-12वीं शताब्दी के मध्य बंगाल के पाल वंश के शासकों के शासनकाल के दौरान विकसित हुई। इस शैली की विषयवस्तु बौद्ध धर्म से प्रभावित थी। दृष्टांत शैली वाली इस चित्रकला शैली ने नेपाल और तिब्बत की चित्रकला को भी काफी प्रभावित किया।

मुगल शैली
मुगल चित्रकला शैली भारतीय, फारसी और मुस्लिम मिश्रण का विशिष्ट उदाहरण है। अकबर के शासनकाल में लघु चित्रकारी के क्षेत्र में भारत में एक नये युग का सूत्रपात हुआ।  उसके काल की एक उत्कृष्ट कृति हमजानामा है। मुगल चित्रकला नाटकीय कौशल और तूलिका के गहरेपन के लिए विख्यात है।
जहांगीर खुद भी एक अच्छा चित्रकार था। उसने अपने चित्रकारों को छविचित्रों व दरबारी दृश्यों को बनाने के लिए प्रोत्साहित किया। उस्ताद मंसूर, अब्दुल हसन और बिशनदास उसके दरबार के सबसे अच्छे चित्रकार थे। शाहजहां के काल में चित्रकारी के क्षेत्र में कोई ज्यादा कार्य नहीं हुआ, क्योंकि वह स्थापत्य व वास्तु कला में ज्यादा रुचि रखता था

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