महमूद गजनवी

DoThe Best
By DoThe Best September 28, 2015 12:32

महमूद गजनवी, गजनी का राजा था जिसने 971 से 1030 ईस्वी तक शासन कार्य किया था. उन्होंने उसके पिता का नाम सुबुक्त्गीन था.  उसने भारत पर आक्रमण किया और राजपूत शासक आनंदपाल और उसके छह राजपूत सहयोगियों उज्जैन, ग्वालियर, दिल्ली, कालिंजर, अजमेर और कन्नौज, जिन्हें राजपूत महासंघ के रूप में जाना जाता है को पराजित किया. 1071 में हिन्दू शाही राजाओं का राज्य समाप्त हो गया. इस विजय के पश्चात् वह पंजाब, सिंध और मुल्तान के निर्विवाद शासक के रूप में स्थापित हो गया. उसका  अगला अभियान नागरकोट था  जिसकी लूट के लिए उसने 1009 ईस्वी में हमला किया. था. उसके बाद, उसने 1011 ईस्वी  में थानेश्वर पर हमला किया और मेरठ, कन्नौज और मथुरा में भारी लूट मचाई तत्पश्चात वह बड़ी धनराशि के साथ अपने राज्य में वापस आ गया.

महमूद गजनवी ने 1021 ईस्वी में त्रिलोचनपाल  पर हमला किया और उसे हराया. त्रिलोचनपाल अंतिम शाही राजा  जिसे महमूद के द्वारा अजमेर को पलायन करने के लिए मजबूर किया गया था. महमूद गजनवी ने भारत पर एक बार फिर 1024 ईस्वी में  हमला किया था. अजमेर, ग्वालियर और कालिंजर  पर छापा मारने के अलावा  वह सोमनाथ मंदिर को भी दुर्दमनीय तरीके से  लूटा और इसे नष्ट कर दिया. किंवदंतियों के अनुसार सोमनाथ के शिवलिंग के भग्नावशेषों को ले जाकर उसने ग़ज़नी के जामा मस्जिद का हिस्सा बनवाया.  महमूद के सोमनाथ आक्रमण के दौरान चालुक्य वंश का भीम प्रथम उस समय काठियावाड़ का शासक था. अपने अंतिम आक्रमण के दौरान  मलेरिया के कारण 1030 ईसवी में उसका निधन हो गया. फ़िरदौसी महमूद के दरबार में राज कवि था. उसके उपर ईरानी देशप्रेम का इतना उभार हुआ कि वह स्वयं को प्राचीन ईरानी किंवदन्तियों में चर्चित राजा ‘अफ़रासियाब’ का वंशज होने का दावा किया करता था.

महमूद गजनवी ने भारत पर हमला क्यों किया?

उसके भारत पर आक्रमण का प्रमुख कारण भारत की विशाल धन-सम्पदा थी. इन तथ्यों ने उसे भारत की तरफ आकर्षित करने को मजबूर किया. और संभव है की इन्ही कारणों की वजह से वह भारत पर बार बार आक्रमण करता रहा. उसने मूर्तिभंजक उपनाम  को अर्जित करने के लिए  सोमनाथ, कांगड़ा, मथुरा और ज्वालामुखी के मंदिरों को नष्ट किया.

भारत पर गजनवी के आक्रमण का प्रभाव

भारत पर उसके आक्रमण का कोई गहरा राजनीतिक प्रभाव नहीं है. मुहम्मद गज़नवी के आक्रमण के अलावा यह भी संभावना जताई जाती है की राजपूत राजाओं के राजनीतिक एकता के अभाव ने भविष्य में भी अन्य आक्रमणों को आमंत्रित किया.

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By DoThe Best September 28, 2015 12:32
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