मामलूक वंश: रजिया सुल्तान

DoThe Best
By DoThe Best September 23, 2015 11:45

इल्तुतमिश की मृत्यु  के बाद, रजिया दिल्ली सल्तनत की नयी सुल्तान बन गयी. लेकिन यह उसके लिए आसान नहीं था. उसके सुल्तान बनने के पीछे मुख्य कारण यह था कि इल्तुतमिश अपने सभी बेटों को सिहांसन के अयोग्य समझता था और रजिया सिंहासन के लिए एक योग्य उत्तराधिकारी के सभी मानदंडों को पुरा कर रही थी. इसलिए उसने रज़िया को अपने उत्तराधिकारी के रूप में घोषित कर दिया. लेकिन इल्तुतमिश की मृत्यु के तुरंत बाद चहलगानी के सदस्यों ने इल्तुतमिश के निर्णय से असहमति प्रकट की और रज़िया के सुल्तान बनाए जाने का विरोध किया. अपने विरोध प्रक्रिया के अंतर्गत चहलगानी के सदस्यों ने इल्तुतमिश के पुत्र रुकनुद्दीन फ़िरोज़ को अगला शासक बनाया.

रुकनुद्दीन फ़िरोज़ पूरी तरह से अक्षम था और कामुक कार्यों में स्वयं को निर्लिप्त कर लिया. इस तरह से राज्य के समस्त शासनिक-प्रशासनिक कार्यों में बाधा पहुँचनी शुरू हो गयी और अंततः 7 महीने के शासन के बाद उसकी हत्या कर दी गई.

उसकी मृत्यु के बाद रज़िया को 1236 ईस्वी में शासक बनाया गया. रज़िया ने करीब साढ़े तीन साल1240 ईस्वी तक शासन कार्य किया. यद्यपि रज़िया के अन्दर शासक के सभी गुण विद्यमान थे लेकिन चहलगानी सदस्यों(चालीस तुर्कों का समूह) को उसका नियंत्रण मंजूर नहीं था. चहलगानी सदस्यों ने रज़िया से नफरत करना प्रारंभ कर दिया जब उसने याकूत नामक एक व्यक्ति को अपने अस्तबल के अधीक्षक के रूप में नियुक्त किया. याकूत एक अबिसिनियन अफगानी था जिसकी वजह से दिल्ली सल्तनत में तुर्क-अफगानी इर्ष्या की परम्परा की शुरुवात हुई.

रज़िया के विद्रोही प्रमुखों को मलिक अल्तूनिया जोकि भटिंडा का राज्यपाल था, द्वारा समर्थित प्रदान किया गया. जल्दी ही दोनो प्रतिद्वंद्वी समूहों के बीच एक युद्ध की शुरुवात हुई जिसमे याकूत की हत्या कर दी गयी और रजिया को कैदी बना लिया गया.

रजिया सुल्तान ने अल्तूनिया से विवाह कर लिया और दोनों ने संयुक्त रूप से सल्तनत को वापस लेने की कोशिश की जबकि उस समय सल्तनत की गद्दी पर रजिया के भाई मुइज़ुद्दीन बहराम शाह का शासन था. सल्तनत पर आक्रमण के दौरान वे दोनों सल्तनत की सेना के द्वारा पराजित हुए और दिल्ली से पलायन करने को मजबूर किये गए. उल्लेखनीय है की पलायन के दौरान ही दोनों कैथल के पास जाटों के एक समूह के द्वारा पकड़ लिए गए और उनकी हत्या कर दी गयी.

मुइज़ुद्दीन बहराम शाह का शासन काल दो वर्षो तक चला लेकिन उस दौरान पुरे साम्राज्य में केवल हत्या और षडयन्त्र होते रहे. कालांतर में वह स्वयं अपनी सेना के द्वारा ही मार डाला गया. दिल्ली सल्तनत के काल में यह अवधि पूरे साम्राज्य के लिए काफी कठिन थी और जिसने भी शासन किया वे सभी  कठपुतली शासक के रूप में कार्य कारते रहे.

नासिर-उद-दीन महमूद, इल्तुतमिश का सबसे छोटा पुत्र था. उसने  1246 ईस्वी से  1266 ईस्वी तक शासन कार्य किया. यह अपने एक तुर्क प्रमुख बलबन द्वारा मार डाला गया. नासिर-उद-दीन महमूद की हत्या के बाद बलबन दिल्ली सल्तनत का शासक बना.

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