मरीचिका या मृगतृष्णा Mirage

DoTheBest
By DoTheBest May 31, 2015 16:22

मरीचिका या मृगतृष्णा (Mirage)

सघन माध्यम से विरल माध्यम में प्रवेश करने पर प्रकाश की किरण अभिलंब से दूर हट जाती है। इस प्रकार आपतित कोण के बढ़ने से अपवर्तित कोण भी बढ़ते जाता है। आपतित कोण के एक निश्चित मान पर अपवर्तित कोण 90 अंश का हो जाता है। आपतित कोण के इस मान को क्रांतिक कोण कहा जाता है। जब आपतित कोण का मान क्रांतिक कोण से अधिक हो जाता है तो प्रकाश की किरण विरल माध्यम में न जाकर सघन माध्यम में ही परावर्तित हो जाती है जिसे कि पूर्ण आन्तरिक परावर्तन (total internal reflection) के नाम से जाना जाता है। मरीचिका या मृगतृष्णा (Mirage) पूर्ण आन्तरिक परावर्तन (total internal reflection) का ही उदाहरण है।

रेगिस्तान की मरीचिका या मृगतृष्णा (Mirage)

प्रायः गर्मियों के दोपहर में रेगिस्तान की यात्रा करने वाले यात्रियों को कुछ दूरी पर पानी होने का भ्रम हो जाता है। इस भ्रम को रेगिस्तान की मरीचिका या मृगतृष्णा (Mirage) कहते हैं।

मरुस्थल की रेतीली भूमि गर्मी के कारण अधिक गर्म हो जाती है जिसके कारण धरती के पास हवा की गर्म पर्तें विरल हो जाती हैं किन्तु ऊपर की पर्तें ठंडी होने के कारण वे अपेक्षाकृत सघन होती हैं। ऐसी अवस्था में किसी वस्तु या पेड़ की चोटी से आने वाली प्रकाश की किरणें हवा की विभिन्न पर्तों से अपवर्तित होकर अभिलंब से दूर हटती जाती हैं परिणामतः एक ऐसी स्थिति आ जाती है जिसमें इन किरणों का आपतन कोण क्रांतिक कोण से अधिक हो जाता है तथा किरणों का पूर्ण आन्तरिक परावर्तन हो जाता है। पेड़ की चोटी से आती हुई प्रकाश की किरणों का पूर्ण आन्तरिक परावर्तन हो जाने के कारण यात्रियों को पेड़ का उलटा प्रतिबिंब दिखाई देने लगता है जिससे उन्हें भ्रम हो जाता है कि आगे पानी है जिसमें पेड़ की प्रतिबिंब दिखाई दे रही है। इसी को रेगिस्तान की मरीचिका या मृगतृष्णा (Mirage) कहते हैं।

 

ठंडे प्रदेशों में मरीचिका या मृगतृष्णा (Mirage)

ठंडे प्रदेशों में भूमि के पास की हवा ठंडि होकर सघन हो जाती है किन्तु हवा की ऊपरी पर्तें ठंडी होने के कारण विरल ही रहती हैं। दूर समुद्र में तैरत हुए किसी जहाज या अन्य वस्तु से आने वाली प्रकाश की किरणें हवा की विभिन्न पर्तों से अपवर्तित होकर अभिलंब से दूर हटती जाती हैं परिणामतः एक ऐसी स्थिति आ जाती है जिसमें इन किरणों का आपतन कोण क्रांतिक कोण से अधिक हो जाता है तथा किरणों का पूर्ण आन्तरिक परावर्तन हो जाता है। समुद्र में तैरती हुई जहाज या किसी अन्य वस्तु से आती हुई प्रकाश की किरणों का पूर्ण आन्तरिक परावर्तन हो जाने के कारण यात्रियों को जहाज या वह अन्य वस्तु आकाश में उलटा लटका हुआ दिखाई देने लगता है जिसे कि ठंडे प्रदेशों में मरीचिका या मृगतृष्णा (Mirage) कहते हैं।

इटली के दक्षिणी किनारे पर एक ऐसा भी गाँव है जहाँ के लोगों को प्रायः पास ही सिसली द्वीप में एक उलटा नगर बसा हुआ दिखाई देता है।

DoTheBest
By DoTheBest May 31, 2015 16:22
Write a comment

No Comments

No Comments Yet!

Let me tell You a sad story ! There are no comments yet, but You can be first one to comment this article.

Write a comment
View comments

Write a comment

<

3 × two =