इंटरनेट से पढ़ाई कर फॉरेन सर्विस के लिए चुनी गई बरखा

DoThe Best
By DoThe Best June 29, 2015 10:21

इंटरनेट से पढ़ाई कर फॉरेन सर्विस के लिए चुनी गई बरखा

छत्तीसगढ़ की पहली महिला आईएफएस (इंडियन फॉरेन सर्विस) बरखा ताम्रकार अपने प्रदेश को विश्व पटल पर लाना चाहती हैं। राज्य की हस्तकला, प्राकृतिक संसाधन, संस्कृति को दुनिया में पहचान दिलाना मकसद है। बरखा को गाइड करने वाला नहीं था, लेकिन इंटरनेट और टॉपर्स के इंटरव्यू को पढ़कर ही यूपीएससी की तैयारी कर ली।

वे आहत हैं कि राज्य की छवि नक्सल प्रदेश के तौर पर देशभर में है। उन्होंने खुद बताया-उनके बाहर के दोस्त कहते हैं कि छत्तीसगढ़ जाएंगे तो किडनैप हो जाएंगे। रायपुर, कुशालपुर की रहने वाली बरखा संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) 2013 की परीक्षा में सफल हुई थीं, जून 2014 को रिजल्ट जारी हुआ।

जहां अधिकतर युवा आईएसएस, आईपीएस बनना चाहते हैं, वहीं बरखा ने भारतीय विदेश सेवा को चुना। अगस्त 2014 में उनकी मसूरी में ट्रेनिंग शुरू हुई और इन दिनों फॉरेन सर्विस पर नई दिल्ली में ट्रेनिंग ले रही हैं।

इसी के अंतर्गत स्टेट स्पेशलाइजेशन के लिए जहां चयनित 23 प्रतिभागियों ने अलग-अलग राज्यों को चुना, वहीं बरखा ने अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ को। वे छत्तीसगढ़ से संबंधित एक प्रोजेक्ट पर काम कर रही हैं, जिसे उन्हें जुलाई में भारत सरकार को सौंपना है। यह उनकी ट्रेनिंग का ही एक हिस्सा है।

‘नईदुनिया’ से बातचीत में बरखा ने कहा कि जब वे कक्षा 5वीं में थी तो उनके मामा फोन पर सिविल सर्विस के बारे में किसी से बात कर रहे थे, पूछने पर बोले- सिविल सर्विस से कलेक्टर बनते हैं।

तभी सिविल सेवा में जाने की इच्छा ने जन्म लिया। मंजिल दिमाग में थी, लेकिन कोई गाइड करने वाला नहीं था। लेकिन इंटरनेट और टॉपर्स के इंटरव्यू को पढ़कर ही यूपीएससी की तैयारी कर ली। पहले ही अटेंम्ट (प्रयास) में सफलता मिल गई। बैंक में क्लर्क बरखा को विदेश मामले में रुचि ने उन्हें यह सफलता दिलाई।

आईएएस, आईपीएस क्यों नहीं चुना?

किसी को मार दूं, ये मेरे बस में नहीं है इसलिए मैंने आईपीएस नहीं बनना पसंद किया। वह मेरी पर्सनालिटी को सुट भी नहीं करता है। 1973 बैच की आईएफएस अधिकारी निरूपमा राय को अपना आदर्श मानने वाली बरखा भारत के विदेश सचिव बनने का सपना संजोए हुए हैं। भारतीय विदेश सेवा में एक भाषा चुनने का भी अवसर दिया जाता है, बरखा ने स्पेनिस को चुना, वे स्पेन जाएंगी। उनका कहना है कि यह विश्व में फ्रेंच के बाद सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है।

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