संथारा पर सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट के फैसले पर लगाई रोक

DoThe Best
By DoThe Best August 31, 2015 12:27

संथारा पर सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट के फैसले पर लगाई रोक

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को संथारा पर राजस्थान हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी है। जैन धर्म में सबसे पुरानी कही जाने वाली संथारा प्रथा को राजस्थान हाईकोर्ट आत्महत्या बताकर इस पर रोक लगा दी थी। इसके विरोध में जैन समाज के लोगों ने पूरे देश में प्रदर्शन किया था। इसके बाद जैन समाज ने हाईकोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

संथारा प्रथा पर हमेशा विवाद रहा है। जैन समाज में इस तरह से देह त्यागने को बहुत पवित्र कार्य माना जाता है।जैन समाज में यह हजारों साल पुरानी प्रथा है। इसमें जब व्यक्ति को लगता है कि उसकी मृत्यु निकट है तो वह खुद को एक कमरे में बंद कर खाना-पीना त्याग देता है।

जैन शास्त्रों में इस तरह की मृत्यु को समाधिमरण, पंडितमरण या संथारा भी कहा जाता है। इसका अर्थ है- जीवन के अंतिम समय में तप-विशेष की आराधना करना। इसे अपश्चिम मारणांतिक भी कहा गया है। इसे जीवन की अंतिम साधना भी माना जाता है, जिसके आधार पर साधक मृत्यु को पास देख सब कुछ त्यागकर मृत्यु का वरण करता है। जैन समाज में इसे महोत्सव भी कहा जाता है।

जैन धर्म के शास्त्रों के मुताबिक, यह निष्प्रतिकार-मरण की विधि है। इसके अनुसार, जब तक अहिंसक इलाज संभव हो, पूरा इलाज कराया जाए। मेडिकल साइंस के अनुसार जब कोई अहिंसक इलाज संभव नहीं रहे, तब रोने-धोने की बजाय शांत परिणाम से आत्मा व परमात्मा का चिंतन करते हुए जीवन की अंतिम सांस तक अच्छे संस्कारों के प्रति समर्पित रहने की विधि का नाम संथारा है। इसे आत्महत्या नहीं कहा जा सकता। इसे धैर्यपूर्वक अंतिम समय तक जीवन को ससम्मान जीने की कला कहा गया है।

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