NDA का सीएम कैंडिडेट कौन, जानना चाहते हैं लोग : शत्रुघ्न सिन्‍हा

DoThe Best
By DoThe Best September 7, 2015 13:56

NDA का सीएम कैंडिडेट कौन, जानना चाहते हैं लोग : शत्रुघ्न सिन्‍हा

बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए का सीएम प्रत्याशी कौन है, यह लोग जानना चाहते हैं। राजग के मुख्यमंत्री के तौर पर पिछले दिनों केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान का नाम उछालने पर भाजपा सांसद और सिनेस्टार शत्रुघ्न सिन्हा ने यह बात कही। उनका मानना है कि एनडीए को अपना सीएम कैंडिडेट घोषित कर देना चाहिए था।

अपनी फिल्मी भाषा शैली में दूसरों को ‘खामोश’ करने वाले सिन्हा ने रविवार को जब जुबान खोली तो वे बहुत कुछ बोल गए। ‘दिल की बात’ कहने रविवार को ‘दैनिक जागरण’ के न्यूजरूम आए शॉटगन ने चर्चा छिडऩे पर दर्द को भी शेयर किया।

बोले, फिलहाल मैं दमन और सम्मान के बीच झूल रहा हूं। ‘स्टारडम’ ही मेरा शत्रु है। कुछ नेताओं को लगता है कि मेरे रहने से रैली में उनका भाषण नहीं सुना जाता। अब मैं अच्छा बोलता हूं, लोग मुझे पसंद करते हैं, तो इसमें मैं क्या करूं।

मुख्यमंत्री पद की दावेदारी पर वे बोले, ‘सीएम बनने की न इच्छा, न अपेक्षा और न समय।’ दूसरे नेताओं के नाम पूछे जाने पर सुशील कुमार मोदी, शाहनवाज हुसैन, कीर्ति आजाद, सीपी ठाकुर, चंद्रमोहन राय जैसे नेताओं के नाम लिए तो, मगर पसंद लोजपा सुप्रीमो रामविलास पासवान को बताया।

शत्रुघ्न सिन्हा बोले, ‘वह उम्र, अनुभव, छवि और काम के बल पर पासवान सबसे योग्य हैं। मेरे इस बयान पर कुछ लोगों ने आपत्ति करते हुए कहा कि वे भाजपा के नहीं हैं, लेकिन एनडीए के तो हैं। घी आखिर गिर तो दाल में ही रहा है।’

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और लालू प्रसाद से अपने रिश्तों पर शत्रुघ्न ने कहा कि उनसे मेरे पारिवारिक संबंध हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद लालू जी की बेटी की शादी में गए थे। मैं पटना का सांसद हूं। नीतीश कुमार से नहीं मिलूंगा तो यहां विकास का काम कैसे होगा? पत्नी पूनम सिन्हा के जदयू से चुनाव लडऩे की चर्चा को उन्होंने सिरे से खारिज कर दिया।

मीडिया में बार-बार बयान देने पर कहा कि जब दल में बात नहीं सुनी जा रही हो, तो दिल की बात मीडिया से कहना जरूरी है। लोकतंत्र में यह चौथा खंभा है। मैं कोई मूर्ख नहीं हूं। पार्टी में सीनियर हूं, जानता हूं, क्या बोल रहा हूं। कभी-कभी कुछ बोलना जरूरी भी होता है।

डीएनए को ले राजनीतिक विवाद पर बोले, कभी-कभी बोलते-बोलते कुछ बातें निकल जाती हैं। मोदी जी के साथ भी ऐसा ही हुआ है। वास्तव में प्रधानमंत्री का मकसद किसी को आहत करना नहीं था।

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