दस दिन में दूसरी बार बोले मोदी, कहा- मिल-जुल कर रहना हमारा कल्चर

DoThe Best
By DoThe Best November 19, 2015 14:12

दस दिन में दूसरी बार बोले मोदी, कहा- मिल-जुल कर रहना हमारा कल्चर

दस दिन में दूसरी बार बोले मोदी, कहा- मिल-जुल कर रहना हमारा कल्चर

भारत में छिड़ी इन्टॉलरेंस पर बहस के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि मिलजुल कर रहना हमारी पहचान है। अमेरिकी अखबार द इकोनॉमिस्ट में मोदी ने एक ऑर्टिकल लिखा, ”डायवर्सिटी इंडियन कल्चर का हिस्सा है। एक लंबे समय से भारत में इसकी मजबूत परंपरा है। जो हमारी सोशल स्ट्रेंथ में दिखाई देता है।” बता दें कि पिछले दस दिन के भीतर ये दूसरी बार है जब इन्टॉलरेंस के मुद्दे पर पीएम ने खुलकर इस तरह कुछ कहा है। इससे पहले उन्होंने ब्रिटेन में साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोला था।
मोदी ने अपने टेन्योर के बारे में क्या कहा?
मोदी ने ऑर्टिकल में अपने टेन्योर के बारे में भी बात की है। उन्होंने लिखा है उनकी सरकार ने 18 माह में बहुत सी उम्मीदों पर खरा उतरने की कोशिश की है। उन्होंने कहा,” लोगों को हमसे ढेर सारी उम्मीदें हैं। हम इस कोशिश में हैं कि इकोनॉमिक डेवलपमेंट के लिए हमारी कोशिशों से देश के पर्यावरण पर गलत असर न पड़े।”
मोदी के अलावा दुनिया के इन हस्तियों के भी ऑर्टिकल
द इकोनॉमिस्ट मैग्जीन के 30वें स्पेशल एडिशन के मौके पर मोदी के साथ दुनिया की कई हस्तियों ने लेख लिखा है। मैग्जीन के इस कवर पेज का नाम है ‘द वर्ल्ड इन 2016’। मोदी के अलावा आईएमएफ चीफ क्रिस्टीन लेगार्ड, नोबल प्राइज विनर मलाल युसुफजई आदि ने भी लेख लिखा है।
हाल ही में राष्ट्रपति ने क्या कहा था?
>नेशनल प्रेस डे के मौके पर प्रेसिडेंट प्रणब मुखर्जी ने कहा था कि नेशनल अवॉर्ड प्रोफेशन में कड़ी मेहनत, टैलेंट और मेरिट के एवज में मिलते हैं। इन अवॉर्ड्स को पाने वालों को इनकी वैल्यू समझनी चाहिए और इनकी कद्र करनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा, “वजहों पर जज्बात हावी नहीं होने चाहिए। गैर-रजामंदी को डिबेट के जरिए जाहिर करना चाहिए।’
>मोदी सरकार में विदेश राज्यमंत्री जनरल वी. के. सिंह ने सोमवार को कहा, ”इन्टॉलरेंस पर बहस गैरजरूरी है। खूब सारे पैसे देकर सरकार के खिलाफ माहौल बनाया गया। यह सिर्फ कुछ राजनीतिक पार्टियों के जरिए बिहार इलेक्शन में वोट पाने के लिए उठाया एक मुद्दा था।”
#Intolerance का विवाद, अब तक किसने लौटाए पुरस्कार और कैसे हुए बयान?
> गोमांस रखने के शक में यूपी के दादरी में एक शख्स की हत्या और कन्नड़ लेखक कलबुर्गी के मर्डर के बाद अवॉर्ड वापसी की शुरुआत हुई।
> 40 से ज्यादा लेखकों ने साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटाए हैं।
> 13 इतिहासकार और कुछ वैज्ञानिकों ने भी राष्ट्रीय पुरस्कार लौटाए हैं।
> दिबाकर बनर्जी को लेकर 10 फिल्मकारों ने नेशनल अवॉर्ड लौटाए।
> राइटर अरुंधति रॉय और फिल्म ‘जाने भी दो यारो’ के डायरेक्टर कुंदन शाह ने नेशनल अवॉर्ड लौटाने का एलान किया। उनके साथ 24 और फिल्मकारों ने अवॉर्ड लौटा दिए।
>इन सभी का आरोप है कि देश में इन्टॉलरेंस यानी असहिष्णुता बढ़ रही है। मोदी सरकार कुछ नहीं कर रही। पीएम भी चुप्पी साधे हुए हैं।
> गृह मंत्री राजनाथ सिंह सहित कई मंत्रियों ने कहा है कि दादरी केस और कलबुर्गी की हत्या जैसे मामलों के लिए सीधे पीएम पर सवाल उठाना सही नहीं है।
> वहीं, अवॉर्ड वापसी के अभियान के खिलाफ भी कुछ लोगों ने अलग मुहिम शुरू की है। पिछले दिनों एक्टर अनुपम खेर ने मार्च फॉर इंडिया निकालकर अवॉर्ड लौटा रहे लोगों का विरोध किया।

 

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