राजस्थान: वन्य जीव अभयारण्य एवं राष्ट्रीय उद्यान

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By DoThe Best June 23, 2015 10:23

राजस्थान बजट घोषणा 2013 के अन्तर्गत पक्षी अभ्यारण्य  स्थापित किया जायेगा – “बड़ोपल पक्षी अभ्यारण्य ” – हनुमानगढ़ जिले की पीलीबंगा तहसील के गांव बड़ोपल में। बड़ोपल गांव विदेशी पक्षियों की शरण स्थली के रूप में प्रसिद्ध है।

➲ किस जिले में सर्वाधिक वन्य जीव अभयारण्य है – उदयपुर

➲ किस जिले में सर्वाधिक आखेट निषिद्ध क्षेत्र है – जोधपुर

➲ राजस्थान का प्रथम राष्ट्रीय उद्यान – रणथंबौर राष्ट्रीय उद्यान (1 नवम्बर 1980)

➲ राजस्थान का दूसरा राष्ट्रीय उद्यान – केवलादेव घना (1981)

➲ विश्व धरोहर के रूप में घोषित अभयारण्य – केवलादेव घना पक्षी विहार (1985)

➲ राजस्थान का पहला बाघ परियोजना क्षेत्र/टाईगर प्रोजेक्ट – रणथंभौर (1974)

➲ राजस्थान का दूसरा बाघ परियोजना क्षेत्र/टाईगर प्रोजेक्ट – सरिस्का (1978)

➲ एशिया की सबसे बड़ी पक्षी प्रजनन स्थली – केवलादेव घना पक्षी विहार

➲ राजस्थान के 2 राष्ट्रीय उद्यान – रणथंभौर व केवलादेव घना

➲ राजस्थान के 2 बाघ परियोजना क्षेत्र/टाईगर प्रोजेक्ट – रणथंभौर व सरिस्का

➲ राज्य पक्षी गोडावन के संरक्षण हेतु प्रसिद्ध दो आखेट निषिद्ध क्षेत्र – सोरसन (बारां), सोंखलिया (अजमेर)

➲ सबसे बड़ा आखेट निषिद्ध क्षेत्र – संवत्सर-कोटसर (बीकानेर)

➲ सबसे छोटा आखेट निषिद्ध क्षेत्र – सैथलसागर (दौसा)

➲ साथीन व ढेंचू है – जोधपुर जिले में स्थित आखेट निषिद्ध क्षेत्र

➲ आकल वुड फाॅसिल पार्क/आकल जीवाश्म क्षेत्र – जैसलमेर

➲ अभयारण्य – स्थापना – क्षेत्रफल (वर्ग किमी)

सरिस्का – 7 नवंबर 1955 – 860
रणथंभौर – 1 नवंबर 1960 – 392
सीतामाता – 1979 – 423
राष्ट्रीय मरू उद्यान – 8 मई 1981 – 3162

➲ केवलादेव घना पक्षी विहार/केवलादेव घना राष्ट्रीय उद्यान का क्षेत्रफल है – 28.73 वर्ग किमी

➲ सीतामाता अभयारण्य में पाई जाने वाली प्रमुख वृक्ष प्रजातियां – सागवान-बांस-महुआ

➲ रणथंभौर को वर्ष 1974 में तथा सरिस्का को वर्ष 1978 में राष्ट्रीय बाघ परियोजना में शामिल किया गया / टाईगर रिजर्व घोषित किया गया।

➲ टाईगर प्रोजेक्ट में शामिल भारत की सबसे छोटी बाघ परियोजना है – रणथंभौर

➲ सीतामाता अभयारण्य किन दो जिलों में विस्तृत है – प्रतापगढ व उदयपुर

➲ सीतामाता अभयारण्य का अधिकांश क्षेत्र प्रतापगढ जिले में आता है।

➲ जलीय पक्षियों की प्रजनन स्थली के रूप में प्रसिद्ध अभयारण्य है – चंबल अभयारण्य

➲ राजस्थान में वन्य जीवों के संरक्षण की शुरूआत कब हुई – 7 नवम्बर 1955 को

➲ राजस्थान में सर्वप्रथम 7 नवम्बर 1955 को घोषित वन्य जीव आरक्षित क्षेत्र – वन विहार, सरिस्का व दर्रा

➲ राजस्थान के कितने प्रतिशत क्षेत्र पर राष्ट्रीय उद्यान एवं वन्य जीव अभयारण्य विस्तृत है – 2.67 प्रतिशत

➲ वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 राजस्थान में कब लागू हुआ – 1973 को

➲ भारत में बाघ परियोजना के जनक माने जाते है – कैलाश सांखला

➲ वन्य जीवों की संख्या की दृष्टि से राजस्थान का देश में स्थान है – दूसरा

➲ राज्य पशु चिंकारा (चैसिंगा) की सर्वाधिक संख्या – सीतामाता अभयारण्य

➲ सागवान वनों की अधिकता – सीतामाता अभयारण्य

➲ राज्य पक्षी गोडावन – राष्ट्रीय मरू उद्यान

➲ उड़न गिलहरी – सीतामाता अभयारण्य

➲ जंगली मुर्गे – मा. आबू अभयारण्य

➲ आकल काष्ठ जीवाश्म पार्क – राष्ट्रीय मरू उद्यान

➲ क्षेत्रफलानुसार सबसे बड़ा – राष्ट्रीय मरू उद्यान (3162 वर्ग किमी)

➲ प्रथम जैविक पार्क –  नाहरगढ अभयारण्य

➲ कृष्ण मृग एवं कुरजां पक्षी- तालछापर अभयारण्य

➲ भारतीय बाघों का घर – रणथंभौर

➲ सर्वाधिक वन्य जीव- रणथंभौर

➲ मोर का सर्वाधिक घनत्व – सरिस्का

➲ दुर्लभ औषधीय वन क्षेत्र – सीतामाता अभयारण्य

➲ हरे कबूतर – सरिस्का

➲ चंदन के वृक्ष – कुंभलगढ अभयारण्य

➲ बटबड़ पक्षी/इंपिरीयल सेंट ग्राउज – गजनेर अभयारण्य

➲ सांपों का संरक्षण स्थल – शेरगढ अभयारण्य

➲ सर्वाधिक जैव विविधता – दर्रा वन्य जीव अभयारण्य

➲ धोंकड़ा वन – दर्रा व रामगढ विषधारी

➲ भेडि़या व जंगली धूसर मुर्गे – कुंभलगढ अभयारण्य

➲ गागरोनी तोते – दर्रा वन्य जीव अभयारण्य

➲ चीतल की मातृभूमि – सीतामाता अभयारण्य

➲ खस नामक घास – जमुवा रामगढ अभयारण्य

➲ मोथिया घास व लाना झाडि़यों हेतु प्रसिद्ध – तालछापर अभयारण्य

➲ क्षेत्रफल की दृष्टि से राष्ट्रीय मरू उद्यान के बाद राजस्थन के तीन सबसे बड़े अभयारण्य (क्रमशः) – सरिस्का-कैलादेवी-कुंभलगढ

➲ क्षेत्रफल की दृष्टि से दो सबसे छोटे अभयारण्य – तालछापर-सज्जनगढ

➲ रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान में क्षेत्रीय प्राकृतिक विज्ञान संग्रहालय स्थापित किया गया है।

➲ गंगानगर-हनुमानगढ-सीकर-झुंझुनू-डूंगरपुर-बांसवाड़ा-भीलवाड़ा आदि जिलों में कोई भी अभयारण्य या आखेट निषिद्ध क्षेत्र नहीं है।

➲ रणथंभौर व सरिस्का के अलावा किस अभयारण्य में बाघ विचरण करते है – रामगढ विषधारी अभयारण्य बूंदी में

➲ राजस्थान का सबसे पहला व सबसे प्राचीन जंतुआलय – जयपुर जंतुआलय (1876)

➲ कौनसा जंतुआलय अपनी पक्षीशाला के लिए प्रसिद्ध है – जोधपुर

➲ सर्वाधिक आखेट निषिद्ध क्षेत्र वाले दो जिले – जोधपुर-बीकानेर

➲ कांटे वाली छिपकली किस आखेट निषिद्ध क्षेत्र में पाई जाती है – रामदेवरा

➲ पश्चिमी राजस्थान में आने वाला प्रसिद्ध भ्रमणशील पक्षी है – कुरजां

➲ इंपीरियल सैण्ड ग्राउज अर्थात बटबड़ पक्षी के लिए विश्व प्रसिद्ध स्थान है – गजनेर (बीकानेर)

➲ राजस्थान का राज्य पक्षी गोड़ावन किन जिलों में पाया जाता है – अजमेर-जैसलमेर-बाड़मेर-बारां

➲ रूस, यूके्रन व कजाकिस्तान (साइबेरियाई क्षेत्र) से आने वाले प्रवासी पक्षी कुरजा का राजस्थान में सबसे बड़ा शरण स्थल है – खींचन (फलोदी तहसील)    ।।- तालछापर (चुरू)

➲ रणथंभौर को नवंबर 1980 में व केवलादेव घना को वर्ष 1981 में राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया।

➲ केवलादेव घना पक्षी विहार को वर्ष 1985 में यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया।

➲ राजस्थान में कुल 25 वन्य जीव अभयारण्य एवं 2 राष्ट्रीय उद्यान है।

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