शुंग, कनव और छेदि राजवंश

DoThe Best
By DoThe Best October 12, 2015 12:19

शुंग राजवंश  ने  185BC  से 73 BC  तक और कनव राजवंश ने  73 BC से 28 BC की अवधि तक शासन किया | शुंग राजवंश की राजधानी विदिषा (मध्य प्रदेश) और कनव राजवंश की राजधानी पाटलीपुत्र  थी |

शुंग राजवंश (185 BC से 73 BC )

शुंग राजवंश  की 185 BC में पुष्यमित्रा शुंग ने स्थापना की | पुष्यमित्रा शुंग अंतिम मौर्य शासक बृहदरथा का मुख्य ब्राह्मण सेनाध्यक्ष था |

शुंग राजवंश से संबन्धित मुख्य बिन्दु निम्न दिये गए हैं :

पुष्यमित्रा शुंग रूढ़िवादि हिन्दू धर्म का कट्टर समर्थक था  |

इसका उत्तराधिकारी इसका पुत्र  अग्निमित्रा शुंग बना जोकि कालिदास के नाटक माल्विकाग्निमित्रा में पुरुष नायक था |

अग्निमित्रा के बाद कुछ कमजोर शासक जैसे वज्रमित्रा, देवभूति, वासुमित्रा और भागभद्रा ने शासन किया |

शुंग काल के दौरान एक प्रसिद्ध ‘बर्हुत स्तूप’ बनाया गया |

शुंग कला के कुछ  उदहारण  चैत्य, विहार, भाजा का स्तूप और नासिक का स्तूप हैं  |

कनव राजवंश (73 BC से 28 BC )

शुंग राजवंश के अंतिम शासक देवभूति का 73 BC में कत्ल कर दिया गया और एक नए  राजवंश कनव राजवंश की स्थापना  वासुदेव  के द्वारा की गई | वासुदेव देवभूति का मंत्री था | कनव राजवंश 28 BC तक रहा |

कनव राजवंश के अन्य शासक थे भूमिमित्रा, नारायण और सुषर्मन | कनव राजवंश का अंत सातवाहन राजवंश के शासक ने किया |

कलिंग का छेदि राजवंश :

कलिंग में प्रथम सदी BC में एक नए राजवंश का उत्थान  हुआ जिसे चेति या छेदि राजवंश कहा गया | हमे इसके बारे में जानकारी उड़ीसा में भुवनेश्वर के निकट हाथीगुंफा अभिलेखों  में मिलती  है |  छेदि राजवंश के तीसरे शासक खारवेल के द्वारा इन अभिलेखों को उत्कीर्ण करवाया गया था | खारवेल जैन धर्म का अनुयायी  था | छेदि राजवंश चेत या चेत्वंसा के नाम से भी प्रसिद्ध है | खारवेल ने अतः अपने अभिलेखों में  चेतराजा (चेताराजवास वधनेना ) के वंश की महिमा का उल्लेख किया था |

अतः कलिंग के छेदि राजवंश को महामेघवाहना परिवार भी कहा जाता है | यह नाम शासकों की ताकत के बारे में बताता है | महामेघवाहना की उपाधि का अर्थ है “महान बादलों के स्वामी” जो बादलों को अपने वाहन के रूप में प्रयोग करता है | यह कहा जा  सकता है कि राजा भी इंद्र की  तरह ही  शक्तिशाली थे |

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By DoThe Best October 12, 2015 12:19
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