शबाना से अलग जावेद अख्तर की राय, कहा- देश में इन्टॉलरेंस नहीं, कोई डर नहीं लगता

DoThe Best
By DoThe Best December 3, 2015 14:02

शबाना से अलग जावेद अख्तर की राय, कहा- देश में इन्टॉलरेंस नहीं, कोई डर नहीं लगता

शबाना से अलग जावेद अख्तर की राय, कहा- देश में इन्टॉलरेंस नहीं, कोई डर नहीं लगता

बॉलीवुड एक्ट्रेस शबाना आजमी ने कुछ दिन पहले देश में बढ़ते इन्टॉलरेन्स के मुद्दे पर कहा था कि मजहब को पहचान बनाने की कोशिश की जा रही है। लेकिन शबाना के पति और मशहूर स्क्रिप्ट राइटर और गीतकार जावेद अख्तर इस मुद्दे पर पत्नी से अलग राय रखते हैं।
बुधवार रात यहां एक प्राेग्राम में जावेद ने कहा, “इन्टॉलरेंस के नाम पर माहौल बिगाड़ने की कोशिश हो रही है, लेकिन असलियत में इन्टॉलरेंस जैसा कुछ भी नहीं है। मुझे मौजूदा माहौल में कभी डर नहीं लगा।”
क्या कहा जावेद ने?
– जावेद अख्तर बुधवार को अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के वुमन्स कॉलेज के सेमिनार में बोल रहे थे।
– उन्होंने कहा, “इन्टॉलरेंस के नाम पर भले ही मुल्क में माहौल बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है, लेकिन असलियत में इन्टॉलरेंस जैसा कुछ भी नहीं है। मुझे इस माहौल में कभी डर नहीं लगा।”
– “देश की संस्कृति शांति, सद्भाव और दोस्ती की है। यहां इन्टॉलरेंस जैसे मुद्दों की लहर उठती भी है, तो फिर खत्म हो जाती है।”
– आमिर खान के बयान पर कहा जावेद ने कहा, “आमिर के बयान को गलत तरीके से लिया गया। आमिर ने नहीं कहा था कि वे देश छोड़कर जा रहे हैं। उन्होंने बस इतना कहा था कि कैसे वे पत्नी किरण की बात सुनकर हैरान हो गए थे।”
– “आमिर खान मौलाना आजाद की फैमिली से हैं। जिस आदमी ने समाज सुधार के लिए मेहनत की हो, उसे शक की नजर से नहीं देखा जा सकता।”
शबाना आजमी ने क्या कहा था?
– पिछले शनिवार को लखनऊ लिटरेचर फेस्ट में शबाना ने कहा था, “1992 में मुझे पहली बार इस बात का अहसास हुआ कि मैं मुसलमान हूं। हर कोई कहने लगा- “ओह, आप तो मुस्लिम हैं।”
– शबाना ने ये भी कहा था कि इस देश में मजहब को ही पहचान बनाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन ये इंडिया की पहचान नहीं है। जब तक इंसान हैं, तब तक इन्टॉलरेंस रहेगी। लेकिन जब यह लॉ एंड ऑर्डर की प्रॉब्लम बन जाती है तो सरकार को इससे निपटना चाहिए। (पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
शबाना ने कुछ दिन पहले भी कहा था कि देश में इन्टॉलरेंस बढ़ रहा है। इस प्रोग्राम में इन्टॉलरेंस के मुद्दे पर शबाना आजमी से सवाल किए गए थे।
#Intolerance : हर महीने बढ़ता गया विवाद, हाेती रहीं घटनाएं
> गोमांस रखने के शक में यूपी के दादरी में एक शख्स की हत्या और कन्नड़ लेखक कलबुर्गी के मर्डर के बाद इन्टॉलरेंस का मुद्दा भड़का और अवॉर्ड वापसी की शुरुआत हुई।
> 40 से ज्यादा लेखकों ने साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटाए। 13 इतिहासकार और कुछ वैज्ञानिकों ने भी राष्ट्रीय पुरस्कार लौटाए।
> पहले दिबाकर बनर्जी सहित 10 फिल्मकारों ने नेशनल अवॉर्ड लौटाए।
> राइटर अरुंधति रॉय और फिल्म ‘जाने भी दो यारो’ के डायरेक्टर कुंदन शाह ने नेशनल अवॉर्ड लौटाने का एलान किया। 24 और फिल्मकारों ने अवॉर्ड लौटा दिए।
>इन सभी का आरोप है कि देश में इन्टॉलरेंस यानी असहिष्णुता बढ़ रही है। मोदी सरकार कुछ नहीं कर रही। पीएम भी चुप्पी साधे हुए हैं।
> वहीं, अवॉर्ड वापसी के अभियान के खिलाफ भी कुछ लोगों ने अलग मुहिम शुरू की। पिछले दिनों एक्टर अनुपम खेर ने मार्च फॉर इंडिया निकालकर अवॉर्ड लौटा रहे लोगों का विरोध किया।
> इस बीच, जम्मू-कश्मीर में विधायक इंजीनियर राशिद ने बीफ पार्टी दी तो कुछ विधायकों ने उनके साथ मारपीट कर दी।
> पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री शाह मेहमूद कसूरी को बुलाने पर मुंबई में शिवसैनिकों ने इवेंट के ऑर्गनाइजर और पूर्व बीजेपी नेता सुधींद्र कुलकर्णी को पीट दिया। शिवसेना ने गजल सिंगर गुलाम अली का प्रोग्राम भी नहीं होने दिया।
> बीजेपी की सरकार वाले राजस्थान की राजधानी जयपुर में एक आर्ट समिट में आर्टिस्ट सिद्धार्थ कलवार के साथ मारपीट हुई। कलवार ने गाय के पुतले को गुब्बारे के सहारे हवा में लटकाया था। इस पर ‘पीपुल फॉर एनिमल’ संस्था के लोगों ने उन्हें पीट दिया। पुलिस भी उन्हें अरेस्ट कर थाने ले गई।
> इन घटनाओं को भी इन्टॉलरेंस से जोड़कर देखा गया।
इन्टॉलरेंस पर बयान देकर विवादों में आ चुके हैं ये लोग
– आमिर ने पिछले हफ्ते एक मीडिया ग्रुप के अवॉर्ड फंक्शन में कहा, “देश का माहौल देखकर एक बार तो पत्नी किरण ने बहुत बड़ी और डरावनी बात कह दी थी। किरण ने पूछा था कि क्या हमें देश छोड़ देना चाहिए? किरण बच्चे की हिफाजत को लेकर डर महसूस कर रही थीं।” (पढ़ें पूरी खबर)
इस बयान के बाद वे विवादों में आ गए। दो दिन बाद उन्हें सफाई भी देनी पड़ी कि वे देश छोड़कर नहीं जाने वाले। (पढ़ें पूरी खबर)
– अपने 50वें बर्थडे पर शाहरुख खान ने देश के माहौल को लेकर चिंता जताई थी। शाहरुख ने कहा था, ”देश में इन्टॉलरेंस बढ़ रहा है। ऐसे में, अगर मुझे कहा जाता है तो एक सिम्बॉलिक जेस्चर के तौर पर मैं भी अवॉर्ड लौटा सकता हूं।” हालांकि, बाद में शाहरुख ने भी सफाई दी कि कहा कि उन्होंने कभी नहीं कहा कि देश में इन्टॉलरेंस बढ़ रहा है।
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