उस्ता कला को बीकानेर के यही शासक भारत में लाये थे

DoThe Best
By DoThe Best May 28, 2015 16:13
  • कर्णसिंह
  • दलपतसिंह
  • ✓​ रायसिंह
  • लूणकरण
उस्ता कला – मध्य एशिया में भव्य महलों, भवनों को विभिन्न प्रकार के फूंलों पत्तों के चित्रों से सजावट का प्रचलन रहा है। फूलों-पतों के इस संयोजन में सुनहरी मनोवत तथा प्राकृतिक रंगो के मेल ने भवनों की दीवारो, छातों, स्तंभों, झरोखों, दरवाजों, मेहराबों, मीनारों को सुसज्जित किया। मध्यकाल में यही कला भारत में मुगल दरबारों में स्थपित हुई है। मुगल काल की ऐतिहासिक इमारतों में ईरानी शैली का यह चित्रांकन आज भी धुधलके में लिपटा है। मुगल दरबारों से यह कला उनके राजाओं के राज्यों में पहुँची तो वही स्थायी हो गयी।
बीकानेर में छठे राजा रायसिंह के मुगल सम्राट अकबर से प्रगाढ सम्बन्ध थे। यह सम्बन्ध पीढी दर पीढी चलता रहा। इसी दौरान मुगलों की कला संस्कृति बीकानेर पहुच गयी। इस कला ने उस्ता जाति के कलाकारों के माध्यम से रेगिस्तान के महलों, हवेलियों, मंदिरों को इन्द्रधनुषी बना दिया। 
DoThe Best
By DoThe Best May 28, 2015 16:13
Write a comment

No Comments

No Comments Yet!

Let me tell You a sad story ! There are no comments yet, but You can be first one to comment this article.

Write a comment
View comments

Write a comment


Warning: Illegal string offset 'rules' in /home2/dothebes/public_html/wp-content/themes/dothebest/functions/filters.php on line 188

Warning: Illegal string offset 'rules' in /home2/dothebes/public_html/wp-content/themes/dothebest/functions/filters.php on line 189
<

7 − three =