नीतीश को जीत दिलाकर दिल्ली पहुंचे प्रशांत, मोदी के विरोधी शौरी से की मुलाकात

DoThe Best
By DoThe Best November 13, 2015 12:19

नीतीश को जीत दिलाकर दिल्ली पहुंचे प्रशांत, मोदी के विरोधी शौरी से की मुलाकात

नीतीश को जीत दिलाकर दिल्ली पहुंचे प्रशांत, मोदी के विरोधी शौरी से की मुलाकात

बिहार विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार और महागठबंधन को शानदार जीत दिलाने में अहम भूमिका अदा कर चुके इलेक्शन स्ट्रैटजिस्ट प्रशांत किशोर ने मोदी विरोधी खेमे के नेता अरुण शौरी से मुलाकात की है। बता दें कि बिहार की चुनावी हार के बाद शौरी कई बार मोदी और अमित शाह पर निशाना साध चुके हैं।
प्रशांत ने क्या कहा?
प्रशांत ने अरुण शौरी से मुलाकात की बात स्वीकार की है। हालांकि, उन्होंने कहा, ”शौरी मेरे पुराने और पर्सनल फ्रेंड हैं।”
मुलाकात पर क्यों है सबकी नजर?
> बिहार में बीजेपी की करारी हार के बाद मोदी-अमित शाह की जोड़ी सीनियर बीजेपी नेताओं के निशाने पर है।
> दीपावली के दिन सीनियर लीडरों (लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, यशवंत सिन्हा और शांता कुमार) ने बयान जारी कर मोदी-शाह पर निशाना साधा था।
> सीनियर लीडर मांग कर रहे हैं कि बिहार इलेक्शन में पार्टी की हार के लिए जिम्मेदारी तय की जाए।
प्रशांत कैसे हुए थे बीजेपी से अलग?
> 2012 के गुजरात विधानसभा इलेक्शन और 2014 के लोकसभा इलेक्शन में प्रशांत किशोर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुख्य रणनीतिकारों में से एक थे।
> लोकसभा इलेक्शन 2014 के बाद प्रशांत किशोर का असर बीजेपी की इलेक्शन स्ट्रैटजी में धीरे-धीरे कम होने लगा।
> प्रशांत किशोर ने दिसंबर 2014 में मोदी का खेमा छोड़कर बिहार इलेक्शन के लिए नीतीश कुमार की मदद करना शुरू कर दिया। इसके पीछे अमित शाह की तरफ से मिली उपेक्षा वजह बताई जाती है। बताया जाता है कि लोकसभा इलेक्शन जीतने के बाद बीजेपी की तरफ से उन्हें पीएमओ में एक अहम पद की पेशकश की गई थी, लेकिन उनकी बात नहीं बन पाई थी।
> बीजेपी हाईकमान को इस बात का भी डर था कि कहीं प्रशांत किशोर और उनकी टीम पार्टी के सामने पैरेलल पावर स्ट्रक्चर न बन जाए। यह बात भी प्रशांत और बीजेपी के बीच मतभेद की एक अहम वजह रही। वहीं, सूत्र बताते हैं कि अमित शाह को यह भी लगता था कि प्रशांत किशोर और उनकी टीम 2014 के चुनाव में बीजेपी की जीत की बड़ी वजह नहीं है।
> मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जाता रहा है कि सरकार में अपनी संभावनाओं के बारे में 2014 में प्रशांत ने अमित शाह से सवाल किया था कि जून के बाद क्या होगा। इस पर शाह ने किशोर से कहा था कि हर जून के बाद जुलाई आता है। उन्होंने प्रशांत को सरकार में तरजीह नहीं दी।
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